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________________ - 2 जं अस्थल उचलधु राम सन्देस | गऊ कण्टयन्नु साथ अणुवन्तु गणेस || [2] - मणि मऊ सायऍ जिणं देव णिम्मिए । सिखाए । रमणी चन्दे व णिम्मिए ॥१॥ घष्टा चन्द्रसाल साला विसालए। टणटणन्त धमालऍ ॥२॥ रणरणन्स क्रिक्किणि सुघोसए । धववयम्त घग्घर - णिघोस ||२३ धवल धववाडीय उडण्ड [ ४६. छापालीसमो संधि ] - - - - 4 वस्त्ररे पत्रण पण्डुरे । चारु मणि-मधारणे । मणि " - छत्त मणिम मणि पवाल मुसालि झुम्बिरे । भमिर पड महलुलोल तालए। जिणवरो तर्हि विमाणे धड पण जन्दणो । चलिय जाइँ गई रवि स सन्दणो ॥ ६॥ · · - - - - N - - - पेणुम्बे शियम्वरे ॥४॥ चमर पकभार भासुरे ||५|| कबाड-मणि - बार- तोरणे ।।६।। - - घत्ता गण भिऍण बिजाहर पवर गरिन्दों । गाइँ सरिवरेंण अवलोइड जयरु महिन्दहाँ ॥ १० ॥ [3] चड दुवारु चउ-गोउरु चड - पायारु पण्डुरं । गयण लग्ग पबणाय धय - मालाडलं पुरं ॥१॥ गिरि महिन्द सिहरे रमाउलं 1 रिद्धि विद्धि धण-धण्ण-संकुलं ॥२॥ तं निरवि इणुएण पुद्धिय रविदाम चिन्तियं 1 'सुरपुरं - लोयनी । कइ हुँ क्रिमिन्देण घत्तिये || ३ || लग्ग बिजावलोयणी ॥४॥ भमर परभार चुम्बरे ||७|| व सुरगिरि जिनालए ॥८॥ -
SR No.090355
Book TitlePaumchariu Part 3
Original Sutra AuthorSwayambhudev
AuthorH C Bhayani
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year
Total Pages261
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size4 MB
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