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जं अस्थल
उचलधु राम
सन्देस |
गऊ कण्टयन्नु साथ अणुवन्तु गणेस ||
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मणि मऊ सायऍ जिणं देव णिम्मिए ।
सिखाए । रमणी चन्दे व णिम्मिए ॥१॥
घष्टा
चन्द्रसाल साला विसालए। टणटणन्त
धमालऍ ॥२॥ रणरणन्स क्रिक्किणि सुघोसए । धववयम्त घग्घर - णिघोस
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धवल धववाडीय
उडण्ड
[ ४६. छापालीसमो संधि ]
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वस्त्ररे पत्रण
पण्डुरे । चारु मणि-मधारणे । मणि
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छत्त
मणिम
मणि पवाल मुसालि झुम्बिरे । भमिर
पड
महलुलोल तालए। जिणवरो
तर्हि विमाणे धड पण जन्दणो । चलिय जाइँ गई रवि स सन्दणो ॥ ६॥
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पेणुम्बे शियम्वरे ॥४॥
चमर पकभार भासुरे ||५||
कबाड-मणि - बार- तोरणे ।।६।।
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घत्ता
गण भिऍण बिजाहर
पवर गरिन्दों । गाइँ सरिवरेंण अवलोइड जयरु महिन्दहाँ ॥ १० ॥
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चड दुवारु चउ-गोउरु चड - पायारु पण्डुरं ।
गयण
लग्ग पबणाय धय - मालाडलं पुरं ॥१॥ गिरि महिन्द सिहरे रमाउलं 1 रिद्धि विद्धि धण-धण्ण-संकुलं ॥२॥ तं निरवि इणुएण पुद्धिय रविदाम
चिन्तियं 1 'सुरपुरं - लोयनी । कइ हुँ
क्रिमिन्देण घत्तिये || ३ || लग्ग बिजावलोयणी ॥४॥
भमर परभार चुम्बरे ||७||
व सुरगिरि जिनालए ॥८॥
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