SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 66
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ५८ . पउमचरित कस्बइ कल्लरियहुँ कणिक्कर । णं सिरमन्ति तिया दिय-मुक्कड़ अइ-बष्णुजलाउ गउ मिट्टउ 1 गं वर-वेसउ वाहिर - मिट्टर ॥५॥ कधइ पृणु तम्बोलिय सन्यउ । णं मुणिवर-मई मभरघउ ॥६॥ अहवाइ सुर-महिला बहुलत्यउ । अण - मुहमुजालेचि समत्थर ||७|| कन्थइ पडियई पासा-जूभई । णहरइ पेक्षण व हह ।।।। मुणिवर इव जिण-णामु लयन्तई । वन्दिप इव सु-दाय मग्गन्तई १६॥ कथइ वर-मालाहर - माउ । णं गयरण काउ सुसस्थड ॥१०॥ कन्या लवण णिम्मल-सारइ । खल-दुजण-चयण व सु-खारई ॥1॥ कन्थह दुप्प . लेख-विमर्मालाई । णाई कुमित्तसणाई असरिसई ॥१२॥ कन्ध उम्मवन्ति पर-माणाई । जम-दूआ भाव-पमाण ।।१३।। कधइ कामिाड मय-मसउ ! णं रिह-वाहुलउ अधिय-कात्ता ॥१४॥ एम असेसु णया वणन्त ! मोत्तिय - सालि घूरन्सङ ॥१५॥ लीलाएँ पाइनु समीरण-णम्दणु । जहि हलहरु. मुग्गीउ जणदणु ॥१६६ धत्ता . रामहों हरिह का द्वयहाँ हणुवन्तु कयअलि हत्यउ । कालहाँ जमहाँ सणिरछरहाँ ज मिलिर कयन्तु उस्था ॥१७॥ [१३] राहवेण वइसारिउ णिय-अखासणे । मुणिवरो व्य थिउ णिश्चलु मिणवर-सासणे ।।१।।
SR No.090355
Book TitlePaumchariu Part 3
Original Sutra AuthorSwayambhudev
AuthorH C Bhayani
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year
Total Pages261
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size4 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy