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________________ पउमचरित तहिं अवसरे जे गया गवेसा । आय पडीचा से वि असेसा ॥४॥ पुत्रिय राहवेण 'वर - धीरही। जम्मच अनाय सोरहो ॥५॥ अहाँ जल-गोलहाँ गवय-गवक्खहौं । सा कि दुरै लत महु अक्सहो ॥६॥ अम्बउ कहाँ लग्गु हलहेइहे । 'रक्खस - दीयहाँ सायरबेइह ॥७॥ जोयण-सयइँ सत्त विहि अन्तरु । तहि मि समुछु रउन्दु भयारु ॥ ला - दाउ वि तेण पमाणे । कहिड जिणिन्दै केवल - णाणे | तहि तिफूह मामेण महाहरू । जोयगाह पञ्चास स - विस्था ॥१०॥ ष तुमन्तरेण तहाँ उप्परि । घिय जोयण बत्तीस काउरि ॥१॥ पत्ता एक वि परिन्दु पीसकर अणु समुई परियरिउ । एक वि केसरि दुष्पेक्सउ भण्णु पडोवउ परवरित ॥१२॥ [११] जसु सइलोक-चक्कु भासका । तेण समाणु भिडवि को सकइ ॥१॥ राहन पण काई भाला । काई । सीयह तर्णण पलाचें ॥२॥ पिण्डत्यणित लाह - लायणउ ! लइ महु तणियर सेरह कण्ण ॥३|| गुणवई हिययवम्म हिययालि । सुरबह पउमावई रयणालि || चन्दकन्त सिरिकम्ताणुवरि । चारूलच्छि मपणवाहिणि सुन्दरिं ॥५॥ सहुँ जिणवाएँ रूव-संपण्णउ । परिणि भडारा एयड कपणा' ॥६॥ ते णितुणेवि बलाएवें वुबह । आयहुँ मज्म ण एक वि रुप ॥७॥ जाइ वि रम्भ अह होइ तिलोत्तम । सीयहें पासिउ अण्ण ण उप्तिम' ॥॥ पत्ता वलगुनहों वाणु सुणेपिणु किक्किन्धाहिवेण हसिउ । 'किट रत्तहाँ तयउ कहाणउ भोयणु मुवि छाणु असिउ ॥६॥ खण खणे घोहहि णाई अयाणद । कि पई ण सुयउ लोपाहाणः ॥ १॥ जा व किं पि अश्चर" ण किजह । ता किं माणुस-मेत्तै दिजा ॥२॥
SR No.090355
Book TitlePaumchariu Part 3
Original Sutra AuthorSwayambhudev
AuthorH C Bhayani
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year
Total Pages261
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size4 MB
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