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________________ पजमचारिउ पावहाँ मुण्डावही सिर-कमलु । सहु णासें छिपा भुष-जुभलु ॥३॥ वूनही दूभजणु दक्खयहाँ । पाहुमउ कयन्तहाँ पट्टयहाँ ।।।। पहु मन्तिहि दुक्खु णिवारियड । सुग्गीव-दूउ गउ खारियर ।।५।। एत्तहँ वि गरिन्छ । संटियर । शिष-सन्दण - वी परिष्टियउ ॥६॥ सन्जहं वि स-साहशु णीसरिड । पचक्नु गाई जमु अवयरिउ ॥७॥ पडिवक्स - पक्ख- संस्खोहणिहि । णिमा सतहि भक्खोहमिहि ॥८॥ धत्ता सुग्गीवहाँ रामहाँ लसणहा विड-सुगाउ गम्पि भिजिउ । हेमन्तहों गिम्भहाँ पाउसहा मं दुकालु समावडिंग ॥६॥ [१] अभिष्टई वेणि मि साहणाई । जिह मिहुणइ तिहहरिसिय-मणा ॥१॥ जिद्द मिहुणई तिह अणुरसाई । जिह मिडणइ सिंह पर-सलाई ॥२॥ जिह मिहुणइ तिह कलबल-करह। जिह मिहुणह तिह मेखिय-सरई ॥३॥ जिह मिठुणाई सिंह बसिपाहरई । जिह मिहुपई तिह सर-जमाई ॥४॥ जिह मिहुणई तिह अम्झाउरई ॥५॥ जिह मिहुई तिह अचम्भदई । जिह मिडणई तिइ विहाफबई ॥६॥ मिह मिहुणई तिह णिस्वेवियस् । जिह मिहुणई तिह पासेड्या ॥७॥ मिह मिडणइ तिह णिकटियई । णिप्फन्दई जुझन्सई थिय ॥८॥
SR No.090355
Book TitlePaumchariu Part 3
Original Sutra AuthorSwayambhudev
AuthorH C Bhayani
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year
Total Pages261
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size4 MB
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