SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 204
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ११६ पामचरि परिधेविउ माह दुमहि । केबलु र मवहि मणपज्जऍहिं ॥२॥ जम्बू-दीव ५ रयणायरहि । पाणणो व कुक्षर-चरहिं ॥३॥ लोयन्तउ व ति-पहाणेहिं । दिवसाहिर व णहें णव-धणेहि ॥४॥ एकलड सुहडु अणन्तु वलु । पपुल्लु तो वि तहाँ मुह-कमलु ॥५|| परिसक्कद यह उल्ललइ । हक्कारह पहाइ दणु दलइ ॥॥ आरोक्का तुक्कई उत्थरह । पवियम्भइ रुम्भा विस्थरइ ॥७॥ ण वि छिज्जइ भिजा पहरण हिं। जिह जिणु संसारहों कारणहि ॥८॥ हणुवहीं पास हिं परिभमह वलु । मन्दर-कोडिहिं उपहि-जल ॥६॥ घप्ता - - धरवि सक्का बलु सयलु वि उक्लय-पहरण । मेरुहे पासहि परिभमइ माई तारायणु ॥१०॥ [.] घाइउ पवण-गन्दणो दशु विमडयो बलहाँ पुलझ्यही । इउ रहु रहवरेण गड गपवरेण तुरऍण व तुरको ।। 111 सुरई सुहहु कबन्धु कवन्धे 1 घसे घन चिन्य हउ चिम्धे ॥२॥ वाणे वाणु चाड वर - चाये । खग्में खग्गु अणिद्विय - गगावें ॥३॥ च चा तिसूलु तिसूलें । मुग्गर भुग्गरेण हुलि हुलें ॥४॥ काणएँ कगड मुसलु वर-मुसलें । कोन्ते कोम्सु रणपणे कुसलें ॥५॥ सेठे सेल्ल खुरुप्पु खुरुप्प । फलिहे फलिहु मम पि गय-हाये ॥६॥ जन्त जन्तु ग्रन्तु पहिस्खलियउ । बलु उजाणु जेम दरमलियउ ॥७॥ मासद लयलोणामिय - मत्पङ । गिग्गइन्दु मिसरत णिस्था ॥ विषरामुहु बोहुलिसम - अयण । भग्ग-मसफर मउलिय-णयण ॥॥
SR No.090355
Book TitlePaumchariu Part 3
Original Sutra AuthorSwayambhudev
AuthorH C Bhayani
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year
Total Pages261
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size4 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy