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________________ १८० पडमचरित विपिण विजामु लिन्ति मरहम्तहाँ। तर णिसियरण मुहहणुवन्तहाँ ॥८॥ सेण वि तिक्स-वरुप हि खण्डिउ । बलि जिह दिसिहि बिहा वि पण्डित । धत्ता . पुणं मुश्क महीहरु स-सा स-कन्दरु लो वि पडीपड विष्णु किह । जण-गपणाणन्दै परम-जिन्दै भासणु भव-संसार सिंह ॥१०॥ अषणेक्कु किर गिरिवर मुभा जाहि । बामा ३६५ - सुएण ॥ णिय-भुन-वलंण मावि जहरफन्सरे । सहु रहारेण पत्तिउ पुथ्व-सायरे । सारहि णिहत तुराम पाइप । श्रासालियाँ महाप? लाइम ॥२॥ अक्साट गया मगरों उप्पाले वि । भाउ खणखें सिल संचालें वि ॥३॥ किर परिघिवह विपरचम्छ-त्थलें । हणुवें अवर भमावि पाहयले ॥॥ अतिउ दाहिण-लवण-महष्णवे । भाउ पडीवउ भिडिउ महाये ॥५॥ पुमरवि घसिड पच्छिम-सायर । सहि मि पराइड णिविसम्मन्तरें ॥६॥ पुण आवादिर उत्सर-वासें 1 पर परीवउ सहुँ पीसा ।।७॥ पुणु सहयलहों पितु भामेपिनु । मेरुहें पास हि भामरि देपिणु मा पच झणस्तरे पर गज्जन्तड । 'मारुइ पारु पहरू' पभणन्तउ ।।६।। धत्ता (स) मिसुमेवि पवोशिय सुर मण होशिय 'महाँ कह दूभाओं वणिय ।। दुबरु जीवेसह रामहतसह कुसळ-वस सीयाँ तषिय ॥१०॥ जोगण-सऍण जो घल्लिड प्रावइ (1)। भइ-मनमाड मणु कामिनि गाए ।।
SR No.090355
Book TitlePaumchariu Part 3
Original Sutra AuthorSwayambhudev
AuthorH C Bhayani
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year
Total Pages261
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size4 MB
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