SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 178
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ १७० पश्मचरित [१३] दुवई जड जड एवणपुत् परिसराई तर तउ बलु ण थाई। कुन्दप गियय कन्ते सुकलस व गड़ जासह य दुबई ॥१॥ सुकलसु जेम अड्डु जाइ । सु-कलतु जेम भिउबिहिं ग थाइ ॥२॥ मु-कलतु जेम विवरिउ ॥ होइ । सु-कलत्त जेम वयणु वि ण जोइ ॥३॥ सु-कलातु जेम टूरिउ मगेण सु-कलन्तु जेम तुक्क खणेण ॥४॥ सु-कलत्त जेम ओसार दे । सुकलतु जेम करयल धुणेह ॥५॥ सु-कलत्तु न सिंहकन्तु जाई । सुकत जम पासेउ लेह ॥६॥ सु-कलम जेम रोसेण वलई । सुकलतु जैम सम्पस खलइ ॥७॥ सु-कलस जेम संकुह्य वयणु । मु-कलतु जेम भडलन्त-णयणु ||८|| सु-कलतु जेम किय बर-भमुहु । मुकलत जैम धारन्तु समुहु ॥६॥ धत्ता रोकाई कोका दुक्का वि वेढइ वलइ धाइ परिपेल्लङ् । इणुवाँ वलु सु-कलस जिह पिट्टिजना वि मग्गु ण मेशलह ||३०|| [१४] दुवई हुलि-हल - मुसल-सूल - सर-सन्चल-पहिस-फलिह-कोन्त हि । गय-मोग्गर-मुसुषिद्ध - मस - कोन्तहि सूलेहि परसु-चहि ॥१॥ हड पयण पुस्तु 1 रणे उत्थरन्नु ॥२॥ तेण वि चलेण । दिढ-भु - वलेण ॥३॥ गिद्दलिउ सिमिरु | चमरेण धमरु ॥५॥ छत्तण छत्तु | कोन्तेण कोन्तु || खग्येण खग्गु । धाउ धएँग भागु ॥६॥
SR No.090355
Book TitlePaumchariu Part 3
Original Sutra AuthorSwayambhudev
AuthorH C Bhayani
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year
Total Pages261
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size4 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy