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________________ १६६ पउमचरित [39] दुबई तंगिसुमेवि घराणु मन्दोपरि पिसुणइ मिसियो । 'किन्न कमणि देव पई बुझिट जसु तणिय जणणि चढणक्षण | बारह क्षेत्रम धीमा सुड महिन्दहाँ ॥ १ ॥ वरिसš परि ||२|| सुधारिदुर्गेषि ॥३॥ पण गम्मू कुलहरों विसब्जिया गय वहि मि। वणवास पसूय गम्पि कहि मि ॥४॥ विबाहर हिँ चउदिसु गविद्व । गिरि-कुहररुभम्त जवर दिइ ||५| किउ इणुरु- शेवन्तरे निवासु । हजुवन्तु पासिउ नामु तासु ॥ ६ ॥ परिणावि पहूँ वि अणकुसुम । कलि-लय च उम्भिण्ण-कुसुम ॥७॥ इय उपचार पक्कु त्रिनाउ । अष्णु वि हरिहिँ पाइकु जाउ ||८|| जं आइङ अङ्गुत्थलउ लेवि । भहु उडिउ गलगज्जिड करेषि ॥१॥ घत्ता एक वि उबवणे दरमलिएँ दहमुह- हुवहु फसि पतित । अष्णु ি पुणु मन्वोयरिंएँ लेदि पलाल भारु णं विवउ ॥१०॥ ॥ [19] दुबई तं णिसुणेवि वयणु दहववर्णे पवराणस किरा । अबक-मि-संक- वर विक्कम पहरण कर भयङ्करा ||१|| सो वर पणवेवि । आपसु मोवि ॥२॥ पाइक सान्द्र । दिद परिकरराव ॥३॥ सीह स्व संकुद्ध रिउ जय-सिरी लुद्ध ॥४॥ " जलिय-मणि-मडड | विस्फुरिय णिड्डूरियण पण जुल । कण्टइये भाल | उग्गिण भू-भहुरा - उद्घउ ॥५॥ एवर भुअ || ६ ॥ करवाल ॥७॥ - - -
SR No.090355
Book TitlePaumchariu Part 3
Original Sutra AuthorSwayambhudev
AuthorH C Bhayani
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year
Total Pages261
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size4 MB
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