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पउमचरिउ
॥५॥
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सणेण २१६ ||
एव जलहर झील - समुष्वहन्तु । खग्गुअल वर बिजुल लवन्तु ||४|| भउद्दावलि किय धणुहर पवड | हणुवहों अभिडिउ बिसु रथन्तरें अणिलहों णन्दणेण उप्पादिउ चन्दणु दिन सम्पुरिसु जेम बहु-खम-सरीरु । सप्पुरिसु जेम छेए वि सम्पुरिए जेम लीगल महांउ | सम्पुरिस जेए सामण्ण सप्पुरिसु जेम जणवऍ महग्घु । सप्पुरिसु जेम सम्बड़े
धीरु ||७
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घसा
तेण पवर-चन्दन-दुर्मेण आहउ मेहजाउ बस्छत्थले । लउड पहारें बाइयउ पढिड फणिन्दु णाएँ महि-मण्डलें ॥१०॥
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दुबई
पत्ररुआणवाल खसारि वि हय हणुवेण जायँहि । सेसारक्खिपूर्हि दहवयजहाँ गम्पिणु कहिउ तायें हिं ॥१॥
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'भो भो भू-भूसण भुचण पाल । आरुटु पवरामर डामर रणे रउड । परवर व इन्द-विन्द्र महण सहाव सम्गग्ग कामिणि-प्रण-पण चकुण-विबडु । लङ्कालङ्कार निविभ्र अच्छाई काई वेव । वणु भम्पु एक्केण नरेण विरुद्धएण | परन्ते
महागुणडु ||५||
कुन्मुनिवर हियउ जेव ॥ ६ ॥ अमरिस-कुद्रण ॥७॥
उप्पा वि सरल - तमाल- खाल | चेयारि षि हय उज्जाण पाल ||६|| वहिँ अवसरे भायोक्क वरा । वजाउछु
आसाली समत ॥ ६ ॥
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भाउ ॥८॥
सलघु ॥
दुइ शिवण काल ||२सा
चूडामणि जय
मग्गणिग्गय
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समुह ॥३॥
पयाव ॥ ४ ॥
घत्ता
तं जिसुनेपणु दवयणु कुविउ दवग्ग व सिन्तु विष । 'को जम-राएं सम्मरिउ उबवणु भग्गु महारड जेण ॥१०॥