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________________ १५४ पउमचरिउ ॥५॥ | सणेण २१६ || एव जलहर झील - समुष्वहन्तु । खग्गुअल वर बिजुल लवन्तु ||४|| भउद्दावलि किय धणुहर पवड | हणुवहों अभिडिउ बिसु रथन्तरें अणिलहों णन्दणेण उप्पादिउ चन्दणु दिन सम्पुरिसु जेम बहु-खम-सरीरु । सप्पुरिसु जेम छेए वि सम्पुरिए जेम लीगल महांउ | सम्पुरिस जेए सामण्ण सप्पुरिसु जेम जणवऍ महग्घु । सप्पुरिसु जेम सम्बड़े धीरु ||७ J - - - - घसा तेण पवर-चन्दन-दुर्मेण आहउ मेहजाउ बस्छत्थले । लउड पहारें बाइयउ पढिड फणिन्दु णाएँ महि-मण्डलें ॥१०॥ - [ * ] दुबई पत्ररुआणवाल खसारि वि हय हणुवेण जायँहि । सेसारक्खिपूर्हि दहवयजहाँ गम्पिणु कहिउ तायें हिं ॥१॥ - · - 'भो भो भू-भूसण भुचण पाल । आरुटु पवरामर डामर रणे रउड । परवर व इन्द-विन्द्र महण सहाव सम्गग्ग कामिणि-प्रण-पण चकुण-विबडु । लङ्कालङ्कार निविभ्र अच्छाई काई वेव । वणु भम्पु एक्केण नरेण विरुद्धएण | परन्ते महागुणडु ||५|| कुन्मुनिवर हियउ जेव ॥ ६ ॥ अमरिस-कुद्रण ॥७॥ उप्पा वि सरल - तमाल- खाल | चेयारि षि हय उज्जाण पाल ||६|| वहिँ अवसरे भायोक्क वरा । वजाउछु आसाली समत ॥ ६ ॥ - 4 - - भाउ ॥८॥ सलघु ॥ दुइ शिवण काल ||२सा चूडामणि जय मग्गणिग्गय - समुह ॥३॥ पयाव ॥ ४ ॥ घत्ता तं जिसुनेपणु दवयणु कुविउ दवग्ग व सिन्तु विष । 'को जम-राएं सम्मरिउ उबवणु भग्गु महारड जेण ॥१०॥
SR No.090355
Book TitlePaumchariu Part 3
Original Sutra AuthorSwayambhudev
AuthorH C Bhayani
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year
Total Pages261
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size4 MB
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