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________________ ६३ पडमचरित पत्ता मारुइ-कर-पम्मु ण तेण · पवर-कप्पडुम-बाए । एकदन्तु घुम्मन्तु रणे पाखिड रुस्खु बेम दुम्चाएं ॥१॥ .] दुबई ताम कयन्सका आहवं असक सहक-सम-वलो। इस्थि व गिल-गण्ड तिथसहुँ पचपदु कोदण्ड-करयलो ।।३।। जो दाहिण - वारहों रक्खघालु । कोकन्तु पधाइड मुह - कराल ।।२।। 'वणु भगा वि कदि इणुवन्त जाहि । लइ एहरणु अहिमुहु थाहि पाहि ||३|| जिह हउ दादावलि उत्थरन्तु । अण्णु वि विणियाइज एकदन्तु ।।५।। तिह पहरु पहरु भो पवणजाय । दायणही केरा कुछ पाय' ॥५॥ पचार दि पावणि धणुधरेण ! घिहि सरेंहि बिन्द्र रणे दुखरेण ॥६॥ परिअवि णिवडिय पुरउ तासु । पामि-विणमि व पढम-जिणेसरासु ॥७॥ प्रत्यन्तर रण णीसन्दणे । आरु? पवाहों णन्दणेय || आयामधि उम्मूलिउ तमाल ! णं दिणयरेण तम-तिमिर-जालु ॥॥ घता उभय-कर हि मामेवि तह पहब कयन्तवक्कु दणु-दारें । विहलहुलु घुम्मन्त-तणु गिरि व पलोष्टिंउ कुलिस-पहारें ॥१०॥ [ ] दुवई णिहाँ कयन्तवकै अणे णिसायरु भय-विवज्जि 1 घर-करवाल-हत्थु कोकन्तु पधाइड मेहगजिभो॥ सो पस्छिम-धारहों रखवालु । उमड़-भिउडी - भार - करालु ।।२।। रत्न प्पल - दल - संकास- जयणु । अझ - हास - मेसन्त - वयणु ॥३॥
SR No.090355
Book TitlePaumchariu Part 3
Original Sutra AuthorSwayambhudev
AuthorH C Bhayani
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year
Total Pages261
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size4 MB
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