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________________ पडमचरित सुरतरू-कयली कयम्बम्ब-अम्बीर अम्बुम्बरा लिम्ब-कोसम्व-कावर कापूर-तारूर. माशा-भासत्थ-णगोहपा ।।५।। तिलय-वउल-चम्मवा जागबेशी-चया पिप्पली पुप्फली पाडली केयई माही मल्लिया माहुलिङ्गी-सरू ॥३॥ स-फणस लवली-सिरीखण्ड-मन्दागरू-सिन्हया पुतीवा सिरोसेस्थियारि हया कोडया हिया णालिकोब्बई ॥७॥ हरिद-हरिया-एकरचाललावक्षया शिक-वन्दुक-कोरण्ट चाणिक्ख-वेणू-तिस का-मिरी-अझया उउम-चित्रा-महू II कणहर-कणियारि सेस्ल करारा करक्षामला ककुणी-काणा एबमाइति अणे वि जे पामवा केण ते बुझिया ।। धत्ता आयहुँ पपर-महद्दुमहुँ पहिल3 पारियाउ आयामिउ । मं धरणिह जेमणउ करु उप्पादेपिणु पाहयले भामिङ ॥10॥ [३] दुवई सुरतरु परिधिवेवि उम्मूलिउ पुणु पारगोह-तरुवरी। भायामें वि भुएहिं दहवयणे जिह काहलास-गिरिधरी ॥१॥ कलिउ चर पाय थररन्तु । गं बहरि रसायलें पइसरन्नु ।।२।। गं शन्दण-वणही रसन्तु साउ । गं धरणिहें वाहा-दण्ड वीज ॥३॥ गं दहावयणहों अहिमाण-स्वम्भु । णं पुहइ-पस्यम् पवर गम्भु ॥४॥ नुहन्त सयल-घण-मूल-जालु । पारोह-ललम्सु बिसाल-डालु ||५|| भारत - पत्त - परिघोलमाणु । तुण्डर - वर - परियम्विनमाणु ।।३।। कलयण्डि - कलायाराव - मुहल्लु । पिम्मउरु वि सप्पुरिसो व सुहल ॥७॥ घत्सा सो सोहह जग्गोह-तरु मारुप सुय-भुगल विहिं लड़यड । जावइ गाहें जउण वि मम पयागु परिहिउ तइपड ॥८॥
SR No.090355
Book TitlePaumchariu Part 3
Original Sutra AuthorSwayambhudev
AuthorH C Bhayani
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year
Total Pages261
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size4 MB
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