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________________ [५१ एकवण्णासमो संधि ] सं घडामणि लेवि गउ लरिच-णिवासहरे भवलिय-माणहो । र्ण सुर-करि कमलिणि-वणही मारह वलिउ समुहु उमाणहाँ । [ ] दुबई विधि वाहु-दण्ड परिचिन्तइ रिउ-जयलधि-महालो । 'ताम ण डामि अज्नु बाम ण रोसाविउ म दसाणको ॥१॥ वणु भामि रसमसकसमसन्तु । महिनीठ-गाहु बिरसोरसन्तु ॥२॥ णायउल - विउल -घुम्भल - वलन्तु । रुक्खुक्सय-खर-खोमिए खलन्तु ॥३॥ णीसेस - दियन्तर - परिमलनातु । कलि - वेलिरुबली-लालन्तु ॥२॥ सुमन - भिङ्ग - गुमुगुमुगुमन्तु । तरुलमा-भग्ग-दुमुमुदुमन्तु ॥५॥ एला - कोलय - कश्यन्तु । वड-विटव-ताड-सस्तासरन्तु ।।३॥ करमर . करीर • करकरपरन्तु । आसस्थागरिथ्य - थरहरन्तु ॥७॥ मड-मछ सय-खण्ड जन्तु । सप्तश्य-कुसुमामोष दिन्तु ॥८॥ वत्ता उम्मूलन्तु असेस तर एक मुहुरु एत्यु परिसकमि ।। जोवणु जेम विलासिणि वणु दस्मलमि अमु जिह समि' ॥३॥ [२] दुवई पुणरवि पारकार परिमन्त्रवि णियय-मणेन सुन्दरो। णपण-वण पडद णं माणस-सरवर अमर भरो ॥१॥ णवरि उवणालए तेल्थु णिजमाइयासोग-णार-पुण्यागणागा लवका पिया-विडमा समुहा सत्तलया ॥२॥ करमर-करवन्व-रतन्दना दारिमी-देवदारूलिही-भुभा दमख-रुक्स-पड मक्ख-भइमुत्तया ॥ तरु तरल-तमाल-शालेलककोल-साला विसालाणा पक्षाला णिम्-सिन्दार सिन्दूर-मन्दम्र-कृपये सबजुषा ll
SR No.090355
Book TitlePaumchariu Part 3
Original Sutra AuthorSwayambhudev
AuthorH C Bhayani
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year
Total Pages261
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size4 MB
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