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________________ पढमचरिङ [5] निसि-पहरें चउरथ तानियऍ णं जग कवाडे उघाडियएँ । तहिँ तेहऍ काल पगासियड तियडऍ सिविणड विष्णासियत ॥ १ ॥ 'इ ह लबलिए लहऍ बजिए। सुमनें सुबुद्धिए तार तर ि॥२॥ इलें कहो लिए कुवलय- लोयणें । इसे गन्धारि गोरि गोरोय ॥३॥ हलै विजय जाम मयाणि ॥४॥ सिविण्ड अज्जु मा तह तह सम्वु तेज सो विणिव । भई विउ एकु जोहु उज्जाण पडूवर || ५१ आकरिसिउ । वजें जिह वण भङ्गु पदरिसिङ ॥ ६ ॥ इन्दह-राए । पाव-पिण्डु णं गरुन कसा ॥७॥ वेडेपणु | गउ दस सिर सिरे पाउ वेपिशु ॥ हरि सिय-ग किड घर-भ नाइँ दु-कलसें ॥१॥ पट्टण पसा पुशु थोवन्स 1 १३६ धता तावन्ने गरवरेण सुरबहुअ- सुहालय खोरणिय । उप्पादेपिशु बहि-जलै आवट्टिय लङ्क स-तोरणिय ||१०|| [ x ] जणु सुर्णेदिति त सहिँ एक मर्णे व वण । . 'ह चक्रउ सिविणउ दिट्ठ पई रावणहाँ कहेव गम्पि मई ॥१॥ घुड जं दिह मणोहरु उववणु तं वइदेहि केरड योग्य ॥२॥ जिवरम लिड जेण सो रावणु । जो णिवद्ध सो सस भयावणु ॥ ३ ॥ ु जो दहगीवहाँ उयरि पधाइड 1 सो णिस्मलु जसुकद्दिमि ण माइ ॥४॥ जं पुहई जयधरु विसि तं पर-बलु दहमुहण दिणासि ॥५॥ जं परिचित लङ्क रचणायरें । सा मिद्दिलिय पसारिम सिरिहरें १६॥ A
SR No.090355
Book TitlePaumchariu Part 3
Original Sutra AuthorSwayambhudev
AuthorH C Bhayani
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year
Total Pages261
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size4 MB
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