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________________ परमचरित पहले अम्मन्सर पहसरवि पल्ल परिसु जीवित अवारवि । णीसरिउ पर्गवउ पणि किह माह ताधि फा घि विम्म मिह ॥३॥ [ ] परियासालिया जे समरणे : उहिउ कलयलु हणुयहाँ साहणे ॥ तेन तेन सेन चित्तें ॥ ४ ॥ ॥ दिपाई तरई विजउ पधुहउ । माना लीलण का पदुर ॥ सेन तेन तेन चिों ॥ ॥ २ ॥ जें दिख पहणि पइसरन्तु । वजाउछु धाइउ 'हशु' भणन्तु ॥३॥ 'आसाली ववि महाणुभाव । मरु पहरू पहरु कहि जाहि पाव ॥१॥ वयोण तेण हणुवन्तु बकित । णं सीहहाँ अहिमुडु सीहु चलिड ॥५!। अभिष्ट वै वि गय-गहिय - हत्थ । रिउ रण- भर- परियण- समन्थ ॥ बलु बलही भिरित गउ गयहाँ हुक्कातुर यहाँ नुर रह रहहों मुस्कु ।।७।। धड धयहाँ विमाणहाँ पर-विमाणु: रणु जाउ सुरग्सुर - रण - समाणु III पत्ता रह-तुरय जोह-गय - वाहण मारूह - विझाहर - साहणई । अम्भिाई वे वि स कलयलई णं लक्षण-खर-दूसणा • बाल ६॥ वे वि परोप्पर अमरिस कुबई । वे वि रणपणे जय-सिरि लुबई । तेन तेन तेन चित्तें ॥ ४ ॥ १ ॥ घे वि हणन्तई कर-परिहस्माई। दुमस-मुहई च अइ दुप्पेच्छाई । तेन तेन तेन विरों 11 * ॥ २ ॥ सहि तेहए रणे वन्स घोर । बहु - पहरा - को पइन्ते योरें ।।३।। णिसियर - धरण फोन्तावहेण । हकारिउ पिहुमइ हयमुहेण ।।५।।
SR No.090355
Book TitlePaumchariu Part 3
Original Sutra AuthorSwayambhudev
AuthorH C Bhayani
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year
Total Pages261
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size4 MB
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