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________________ ४६ षड्द्रध्य-पंचास्तिकायवर्णन समय व्याख्या गाथा-११ उम्पत्ती व विणासो दब्बस्स य णत्थि अस्थि सम्भावो । विग-मुण्याद-धुवत्तं करेंति तस्सेव पज्जाया ।।११।। उत्पत्तिर्वा विनाशो द्रव्यस्य च नास्त्यस्ति सद्भावः । विगमोत्पादध्रुवत्वं कुर्वन्ति तस्यैव पर्यायाः ।।११।। द्रव्यस्य हि सहक्रमप्रवृत्तगुणपर्यायसद्भावरूपस्य त्रिकालावस्थायिनोऽनादिनिधनस्य न समुच्छेदसमुदयौ युक्तौ । अथ तस्यैव पर्यायाणां सहप्रवृत्तिभाजां केषांचित् ध्रौव्यसंभवेऽप्यपरेषां क्रमप्रवृत्तिभाजां विनाशसंभवसंभावनमुफ्पन्नम् । ततो द्रव्यार्पणायामनुत्पादमनुच्छेदं सत्स्वभावमेव द्रव्यं, तदेव पर्यायार्थार्पणायां सोत्पादं सोच्छेदं चावबोद्धव्यम् । सर्वमिदमनवद्यञ्च द्रव्यपर्यायाणामभेदात् ।।११।। हिन्दी समय व्याख्या गाथा-११ अन्वयार्थ (द्रव्यस्य च ) द्रव्यका ( उत्पत्तिः ) उत्पाद ( वा ) या ( विनाश: ) विनाश ( न अस्ति ) नहीं है, ( सद्भाव; अस्ति ) सद्भाव है । ( तस्य एव पर्यायाः ) उसीकी पर्याये ( विगमोत्पादध्रुवत्वं ) विनाश, उत्पाद और ध्रुवता ( कुर्वन्ति ) करती हैं। टीका-यहाँ दोनों नयों द्वारा द्रव्यका लक्षण विभक्त किया है । सहवर्ती गुणों और क्रमवर्ती पर्यायोंके सद्भावरूप, त्रिकाल-अवस्थायी ( त्रिकाल स्थित रहनेवाले ) अनादि-अनंत द्रव्यके विनाश और उत्पाद उचित नहीं हैं। परन्तु उसीकी पर्यायों का जो सहवर्ती हैं, ध्रौव्य होने पर भी अन्य क्रमवर्ती पर्यायों का विनाश और उत्पाद होना घटित होते हैं। इसलिये द्रव्य द्रव्यार्थिक आदेशसे ( कथनसे) उत्पादरहित, विनाशरहित, सत् स्वभाववाला ही जानना चाहिये और वहीं ( द्रव्य ) पर्यायार्थिक आदेशसे उत्पादवाला तथा विनाशवाला जानना चाहिये । - यह सब निरबद्य ( -निर्दोष, निर्बाध, अविरुद्ध ) है, क्योंकि द्रव्य और पर्यायोंका अभेद ( -अभित्रपना ) है ।।११।। संस्कृत तात्पर्यवृत्ति गाथा-११ अथ गाथापूर्वार्द्धन द्रब्यार्थिकनयेन द्रव्यलक्षणं उत्तरार्द्धन पर्यायार्थिकनयेन पर्यायलक्षणं प्रतिपादयति । उत्पत्ती य विणासो दव्वस्स य णत्यि-अनादिनिधनस्य द्रव्यस्य द्रव्यार्थिकनयेनोत्पत्तिश्च विनाशो वा नास्ति । तर्हि किमस्ति ? अत्थि सब्भावो–अस्ति विद्यते । स कः । सद्भाव: सत्सास्तित्वं इत्यनेन पूर्वागाथाणितमेव क्षणिकैकान्तमतनिराकरणं समर्थितं । वयमुमादधुवतं
SR No.090326
Book TitlePanchastikay
Original Sutra AuthorKundkundacharya
AuthorShreelal Jain Vyakaranshastri
PublisherBharat Varshiya Anekant Vidwat Parishad
Publication Year
Total Pages421
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, & Religion
File Size11 MB
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