SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 48
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ 思い निमित्तशास्त्रम् [ ३५ प्रधान की मृत्यु होगी और प्रतिमा जी की भुजा टूटने से मनुष्यों को घोर पीड़ा होगी । पडिमा विणिगामेण य रायामरणंच चोर अग्निभयं । जायइ तइए मासे पडिए पुण लक्खइ पडणं ॥७७॥ अर्थ : यदि प्रतिमा से आग निकलते हुए दिखाई पड़े अथवा मूर्ति सिंहासन से गिर पड़े तो जान लो कि तृतीय माह में राजा की मृत्यु होगी तथा नगर में चोर व अग्नि का भय होगा । जइ पुण एए सव्वे पक्खब्भंतरेण उप्पाया । जायंति तया खिप्पं दुब्भिक्खभयं णिवेदंति ॥७८॥ अर्थ : यदि उपर्युक्त उत्पात बराबर पन्द्रह दिन होता रहे तो बहुत शीघ्र दुष्काल का भय अवश्य होगा । देवा णच्वंति जिहं परिसज्जंतीय तहय रोवंति । जय घूमंति चलंतिय हसंति वा विधिहरूवेहि ॥७९॥ अर्थ : यदि देव की प्रतिमा नाचने लगे, जीभ निकाले, रोने लगे, घूमने लगे, चलने लगे, हँसने लगे या कई प्रकार के भाव दिखाती हो तोभावार्थ: होती है । प्रतिमा विकृतरूप से दिखाई पड़े तो अवश्य ही कुफल की प्राप्ति प्रतिमा विकृतरूप में कैसे होगी ? देव की प्रतिमा नाचने लगे, जीभ निकाले, रोने लगे, घूमने लगे, चलने लगे, हँसने लगे या इस तरह कोई भाव प्रकट करने वाली होगी, तो क्या फल होगा ? इसका वर्णन आगे तिच्या जायेगा ।
SR No.090300
Book TitleDavvnimittam
Original Sutra AuthorRushiputra Maharaj
AuthorSuvidhisagar Maharaj
PublisherBharatkumar Indarchand Papdiwal
Publication Year2003
Total Pages133
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, & Religion
File Size3 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy