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________________ मलाराधना आखासः असत्य भाषण पापानवका कारण है. इदयमें पापरहित बसु राजा असत्यभाषणसे नरकमें चला गया. परलोगम्मि वि दोस्सा ते चेव हवंति अलियवादिस्स ॥ मोसादीए दोसे जत्तेण वि परिहरंतरस ॥ ८५० ॥ असत्यवादिनो दोषाः परत्रापि भवन्ति ते ।। मुंचतोऽपि प्रयत्नेन मृषाभाषादिषणम् ॥ ८६०।। बिजयोदया-परलोगम्मि चि डोसा परभवेऽपि दोषास्त एव अप्रत्ययादय एव मवयलीकवादिनः। यत्नेनापि परिदरतः । किं ? मोसादिगे दोसे मृषादिकाम्दोपान । मृषा आदियघां स्ते यातापरियहाणां ते मपातयः । अतगणसं. परितरतः । कि ? मोसादिगामापारिहरतोऽपीत्यर्थः दोष परलोकमें भी प्राप्त हो अर्थ-असत्य बोलनेवाले पुरुषको अविश्वास वगैरे दोष परलोकमें भी माप्त होते हैं. असत्य भाषण चोरी मेधन, परिग्रह वगैरह पापोंका त्याग करनेपर भी, परलोकमें इन दोपोंका यह पुरुष कर्ता है ऐसा माना जाता है. पम्जन्ममें बड़े प्रयत्नसे इनका त्याग करने पर भी इन दोपोंका उसके ऊपर आरोप आता है. भवतु नाम अप्रत्ययत्वादिका मृषावादस्य दोषाः कर्कशवचनादिना परभवे इस चाय के दोया रस्त्राचष्ट इहलोइय परलोइय दोसा जे होंति अलियवयणस्त ॥ कक्कसवदणादीण वि दोसा ते चेव णादव्वा ॥ ८५१ ।। ये सन्ति बचनेऽलीके दोषा दुःखविधायिनः 11 त एव कथिता जैनैः सकलाः कर्कशादिकाः ।। ८६१ ।। विजयोन्या-दहलोगिग दोसा अस्मि अगानि परत्र च ये दोषा भवति अटीकयादिनः । कर्कशवचनादीनामपि त पव दोपा इति वातव्याः ॥ असत्यवचन बोलनेस अविश्वास वगैरह दोष उत्पन्न होते हैं परंतु कर्कशवचनादिकसे परमवमें अथवा इस भवमें कोनसे दोष उत्पन्न होते हैं ? इस प्रश्नका उत्तर--- ranAPADARANAMATA ९७७
SR No.090289
Book TitleMularadhna
Original Sutra AuthorShivkoti Acharya
Author
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages1890
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Ethics, Philosophy, & Religion
File Size48 MB
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