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________________ मुकाधना marati मूलपरा-तं पड्विधमपि । यथास्त्र । ने तस्य । ताहे नदा । प्रत्याख्यानं सूप्रतः । १० । अतः।१०।। कोगना पानक उसको योग्य का उत्तर अर्थ- पानक परिक्रमे प्रकम्पादक मंद बनलाये . तीन प्रकारके आहारका त्याग कराने घर वह पानक उसको उस समय देना योग्य है. पचवाय प्रकरण समाप्त हुआ. E तो आयरियउबझापसिरससाधम्मिगे कुलगणे य ।। जो होजकलाओ से तमहं तिविहेण खामेति ॥ ७१० ॥ आचार्यऽध्यापक शिष्ये संधे साधर्मिके कुले ।। योऽपराचा भवेत्त्रेधा सर्व क्षमयते स तं ।। ७३८ ।। विज्योदया- तो प्रत्याश्यानोचरकाले मायरियउयज्झायसिस्ससामिप आचार्य, उपाध्याये.शिष्ये, सध. मिणि, कुलगणे व कुले गा च । जो होज्ज कसाबो यो संवत्कापायः क्रोधो, मानो, लाभो वा । ते सव्वं गिरधरलेस तं सर्व निरवशेष । तिबिंदण निविधेन । स्वामदिक्षपति निराकरोति। अथैवं प्रतिपन्नभक्तप्रत्याख्यानस्याराधकस्य समाधिमरणसिध्यर्थं चतुर्विधसंघक्षमापणविधि गावाचतुष्टयेन ड्याचष्टेमुलारा--कुलं दीक्षागुरुपूर्वत्रिपुरुपसतानः । साओ क्रोधादीनामन्यतमः । खामेदि क्षमयति || अर्थ-प्रत्याख्यानके अनंतर आचार्य, उपाध्याय, शिष्य, साधर्मिक मुनि, कुलमुनि, और गणमुनि इनके विपयमें जो हृदयमें कषाय होगा अर्थात् क्रोध, मान, माया और लोभ होगा उस सर्व कषायको भपक मन, वचन, काया विशुद्ध कर हृदयसे निकाल देता है. अब्भहियजादहासो मत्थम्मि कदंजली कदपणामो ।। खामेइ सब्बसंघ संवेगं संजणेमाणो ॥ ७११॥ मूर्धन्यस्तकरांभोजो रोमांचांचितविग्रहः ॥ त्रिधा क्षमयते सर्व सवेगं जनयन्नसौ ॥ ७३९ ।।
SR No.090289
Book TitleMularadhna
Original Sutra AuthorShivkoti Acharya
Author
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages1890
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Ethics, Philosophy, & Religion
File Size48 MB
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