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________________ MARATHAMEER मुबारावना आवा ८६० चत्वारस्तम्मलापनोद तय्यादिप्रतिलेखनं च कुर्वन्तीत्याह मूलारा-काश्यमादि विमूत्रश्लेष्मलादिमले। पविठवेंति यहिः क्षिपंति । पडिलेइंति शोधयन्ति । उपधो काले प्रातः सायं च ॥ अर्थ-चार मुनि क्षपकका मलमूत्र निकालनेका कार्य करते है. तथा सूर्यके उदयकालम और अस्तकालके समयमें वे वसतिका, उपकरण और संस्तर इनको शुद्ध करते हैं, स्वच्छ करते हैं, खवगस्स घरवारं सारक्खंति जणा चत्तारि ।। चत्तारि समोसरणदुबार रक्खन्ति जदणाए ॥ ६६६ ॥ क्षपकावसथद्वारं चत्वारः पान्ति यत्नतः॥ धर्मश्रुतिगृहद्वारं चत्वारः पालयन्ति ते॥६९१ ।। विजयोदया-खवगम्स क्षपकस्य । घरबार गृहद्वारं । सारक्खंति पालयन्ति। जदणार यातनाबसारित्वारः। असयतान् शिक्षकांश्च निमुद्वारं पालयन्ति । चत्तारि बत्वारः । समोसरणदुवार समयसरणद्वार। जदणाए यत्नेन आरक्षति पालयन्ति । चत्वारस्तद्गृहद्वारं चत्वारा धर्मश्नवणमष्टपद्वार रक्षतीत्याह मूलारा--सारक्वंति पालयति । असंयतान शिक्षकांश निषेई द्वारपालायते। जवणाए यत्नेन । समोसरणदुवारं धर्मश्रुतिगृहद्वारं ॥ अर्थ- चार परिचारक मुनि क्षपककी वसतिकाके दरवाजेका प्रयत्नसे रक्षण करते हैं. अर्थात असंयत और शिक्षकोंको वे अंदर आनेको मना करते हैं. और चार मुनि समोसरण के द्वारका प्रयत्नसे रक्षण करते हैं. धर्मोपदेश देनेके मंडपके द्वारपर चार मुनि रक्षण के लिये नैठते हैं. ८६० जिदणिहा तलिच्छा गदी जम्मति तह य चत्तारि ॥ चत्तारि गवसंति खु खेत्ते देसप्पवत्तीओ ॥ ६६७ ।।
SR No.090289
Book TitleMularadhna
Original Sutra AuthorShivkoti Acharya
Author
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages1890
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Ethics, Philosophy, & Religion
File Size48 MB
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