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________________ मूलरावना आबा ८३५ संति यस्याः सीप निकृष्ठक्रिया । सा नाया निषेच्या कदाचिदषधैः ।। पालगानिसमाधानरत्नं सदा नुसारकानारामदयाम् ॥६५ विजयोन्या-चारणकोहगकालकर कच्चे चारणकोटकादमी, रजकशालायां रभवणिमाला । मुष. वाटस्य वा जलाशयस्य वा समीपभूताय । एवंचिश्वसधीप ईदृश्श्या वसतौ वसतः । होज्ज वाबादो भवति व्यावासः । कस्य ? समाधीए समायश्चितकाम्न्यस्य । इंद्रियविषया भनोज्ञान शब्दानां रूपादनांय सोनसानामबहुलत्वाच्च ध्यानयिनो भवतीति प्रतिषिभ्यते ब्यावर्णिता वसतिः। मूलारा- चारण भवननाचार्यगायकादयः । कोट्टय अष्टकाः । बर्द्धकिशिलाकुटौदूखलिकादयः । कमाल कल्प पालः । करकरे कचं करपत्रं 1 पुप्फ पुष्पवाटिका मालाकारश्च । य उदक वापीकूपादिजलाशयश्च । समाधीए वाधादो चित्तेकाग्रताया विनाशो भवति मनोजेन्द्रियार्थानां संनिधानाच्हन्याहुल्याच्च । अत्र गंधर्वादिपदैः साहचर्यादिना गायकादयो गृधन्ते। तेन गायकादिशालासमीपयर्तिम्यां वसती समाधिकामैन स्थातव्यमिति तारपर्याथः । ___उक्च-गाधका बादका नर्तकाश्वाक्रिकाः शालिका मालिकाः कोलिका शिकाः ॥ काठिका लौहिका मारिसकाः पात्रिकाः । कालिका वांडिकाथामिकाच्छिपकाः॥चारणा धारणा वाजिनो मेपका । मद्यपाः पंडकाः साधिकाः सेवकाः ॥ प्राविकाः कोपालाः कुलाला भटाः । पण्यनारीजना घृतकारा बिटाः ॥ संति यस्याः समीपे निकृष्ट क्रियाः सा न शय्या निषेच्या कदाचिबुधैः । पालयादिः समाधानरत्नं सदा सतसंसारकांतारविच्छेदकं ॥ अर्थ-भांद, व स्तुतिपाठक, जहां रहते हैं ऐसे स्थानके समीप जो वसतिका होगी वह भी मुनिनिवासके लिये अयोग्य है. जहां शिलावट लोक रहते हैं, जहां बढई, पाथरवट लोक रहते हैं, और जहां मद्य बेचनेवाले लोक रहते हैं ऐसे स्थानके समीप बसतिका मुनिका रहना योग्य नहीं है, जहा धोत्री लोक कपड़े धोते है उस स्थानके समीप वसतिका करना योग्य नहीं है, जहां काठ करोतसे विदारते हैं उस स्थानके समीप बसनिका होना योग्य नहीं है. यमीचा और जलाशयके समीप बसतिका रहना योग्य नहीं है. ऐसी वसतिकाऑम रहनेसे चित्तकी एकाग्रताका नाश होता है. इंद्रियों के मनोहर विषय, और शब्दादिक विषय, समीप होनेसे ध्यानमें विघ्न होता है. इसलिये ऐसी वसतिकायें मुनिओं के लिये वर्ण्य मानी है. Yogeeta
SR No.090289
Book TitleMularadhna
Original Sutra AuthorShivkoti Acharya
Author
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages1890
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Ethics, Philosophy, & Religion
File Size48 MB
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