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________________ मूलाराधना आश्वास तेजोलेश्यादित्रयपरिणतियोग्यतामाह--- मूलारा-तेऊ तेजालेश्या । पम्मा पद्मलेश्या ।। अर्थ---तेजो लेण्या, पालेश्या और शुक्ल लेश्या ये तीन लेश्या प्रशस्त लेश्या है, उत्कृष्ट पैराग्यसे संसारभयको धारण कर यह क्षपक इन तीन लेश्याओंको क्रमसे धारण करता है. एदेसि लेस्साणं विसोधणं पडि उवकमो इणमो ॥ सव्वेसि संगाणं विवजण सव्वहा होई ।। १९१० ॥ कुरुष्व सुखहेतुना मल्लेश्यानां विशोधनम् ।। यत्संगानामशेषाणां सर्वथापि विजिनम् ॥ १९७१।। विजयोदया-पवेसि लेस्लाणं एतासां शुभलण्यानां शुदि प्रत्ययमुएफमः बाह्याभ्यंतरसवपरिप्रइत्यागः। शुभलेश्याविशुद्धसुपायमाइ---- मूलार!-उबकमो उपायः ।। । अर्थ--संपूर्ण परिग्रहोंका अर्थात् बाह्य और अभ्यंतर परिग्रहोंका सर्वथा त्याग करनेसे इन लेश्याओंसे विशुद्धि होती है अर्थात् परिग्रहत्यागही लेश्या विशुद्धिका उपाय है. लेस्सासोधी अज्झवसाणविसोधीए होइ जीवस्स ॥ अज्झवसाणविसोधी मंदकसायस्स णादव्वा ॥ १९११ ॥ लेश्यानां जायते शुद्धिः परिणामविशुद्धितः ।। विशुद्धिः परिणामानां काषायोपशमे सति ॥ १९७२ ।। विजयोदया-लेस्सासोधी लेश्यानां शुद्धिः । अम्यवसाणचिसोधीए होदि परिणामषिशुझ्या मवति । अग्सवसाणषिसुद्धी परिणामविशुद्धिध। मंदकसायरस मदकपायस्य भवतीति शातव्या । उक्तार्थसमर्थनार्थमाइमूलारा- अयवसाण परिणामः। १७०३
SR No.090289
Book TitleMularadhna
Original Sutra AuthorShivkoti Acharya
Author
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages1890
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Ethics, Philosophy, & Religion
File Size48 MB
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