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________________ पलाराधना आश्वास अर्थ- हे भगवन् ! आपने जो सम्यग्ज्ञानका उपदेश मेरेको दिया है.उसे मैं मस्तक नम्र कर ग्रहण करता | ई. आपने जो जैसा कहा है येसी ही मैं प्रवृत्ति करूंगा. १३८६ ... . अप्पा णिच्छदि जहा परमा तुठी य हवदि जह तुज्झ ॥ जह तुझ य संघस्स य सफलो हु परिस्समो होइ ॥ १४८२ ।। यथा मे निस्तरत्यात्मा तुष्टिरस्ति यथा तव ।। संघस्थ सर्वस्य पचा नवास्ति सफलः श्रमः ।। १५४२ ।। विजयोदया–अध्याणिन्छर दि जहा अहं यथा निस्तीणों भवामि. संसारात् । यथा युष्मार्क एम्मा तुष्टिर्भवति । भयतां संघस्य चास्मानुग्रहे प्रवृत्तानां श्रमस्य फलं भवति ।। मूलारा-अप्पा णित्थरदि अयं संसारार्णवानिस्तीर्णी भवामीयर्थः । तुभ युष्माकम् ॥ अर्थ--इस संसारसे मैं जिससे उत्तीर्ण होउगा, जिससे आपको संतोष उत्पन्न होगा, भरे उपर अनुग्रह करने में उद्युक्त हुए आपका और संघका परिश्रम जिससे सफल होगा ऐसे उपायका मैं अबलम्ब करूंगा. - - Hind - - - जह अप्पणो गणस्य य संघस्स य बिस्सुदा हवधि कित्ती॥ संघरस पसायेण य तहहं आराहइस्साभि ।। १९८३ ॥ यधात्मनो गणस्यापि कीर्तिरस्ति प्रथीयसी ॥ अहमाराधयिष्यामि तथा संघप्रसादतः ॥ १५४३ ॥ विजयोदया-जद्द अप्पणो गणस्स यथा मम गणस्य, संघस्य च कीर्तिर्विश्रुता भवति तथाहमाराधयिष्यामि संघस्य प्रसावन । मूलारा--- अपणो ममेत्यर्थः ।। :: अर्थ-मेरी गणकी, और संघकी जिस उपायसे कीर्ति प्रसिद्ध होगी, गणकी कृपासे मैं उस उपायका आश्रय कर रत्नत्रयाराधन करूंगा. १९८६
SR No.090289
Book TitleMularadhna
Original Sutra AuthorShivkoti Acharya
Author
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages1890
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Ethics, Philosophy, & Religion
File Size48 MB
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