________________
-
आधार
अर्थ पुरुपके गले में यह अनर्थों को बांधनी है अथवा पुरुषको देखकर उसमें यह लीन होजाती है अतः इसको 'विलया करते हैं. यह खी पुरुपको दुःखसे संयुक्त करती है अतः ‘युति ' और 'योषा' एसे दो नाम इसके हैं,
इसके हृदयमें धैर्यरूपी बल हद रहता नहीं अतः इसको अबला कहते हैं. कुत्सित ऐसा मरण का उपाय उत्पन्न करती है इस लिये इसको कुमारी कहते हैं. यह पुरुषके ऊपर दोषारोपण करती है उस लिये इस को महिला कहते हैं. एसे स्त्रियोंके जितने नाम हैं वे सर्व अशुभ ही है. स्त्रिया गमद्वेषका निवासस्थान है. असत्य भाषणका घर हैं, अविनयका स्थान हैं और युःखोंका कारण हैं. और कलहका मूल हैं. )
. सोगरस मरी वेररस खणी णिवहो कि होइ कोहस्त ॥ णिचओ णियडीण आसवो य महिला अकित्तीए ॥ ९८३ ।। कुलजातियशोधर्मशरीरार्थशमादयः ॥
नाइयंते योषया सर्वे वात्यया तोयदा इच ।। १००१ ॥ विजयोदया-सोगरत सरी शोकस्य नही । बैग्स्थावनिः । निवहः कोपस्य । नित्रयो निकृतीनां । अकीत. राश्रयो युवतिः॥
मुला-मरी नदी, खणी वानिः, निवहो संघातः । णिवओ राशिः ||
अर्थ-वी शोककी नदी है. पैर की भूमि-अर्थात उस्पति स्थान है. स्त्री कोपका समुदाय रूप है. कपटाका ममूह है और अकीर्तिका आधार है.
00
-
---
-
णासो अत्थरस खओ देहम य दुगदीपमग्गों य ।। आवाहो य अणत्यस्स हीह पहवी य दोसाण ॥ ९८३ ॥ पावकः सुखवासणी अधिसिो दुःखपापसाए । प्रध्ययो प्रसरस्नानामनर्थानां निकेतनम् ॥ १००२ ॥
AREADER
१०१८