SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 116
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ चतुर्थ परिच्छेद [ ११५ होगा तप कर्मों के साथ जुटेगा । सात तत्व भय-वीरोंके साथ युद्ध करेंगे । श्रुतज्ञान अज्ञानका सामना करेगा। प्रायश्चित तीन शस्योंसे भिड़ेगा | चारित्र अनर्थदण्डोंसे लड़ेगा ! दया-धमं सात व्यसनोंके साथ संग्राम करेंगे। इस प्रकार हमारे दलके लाखों योधा तुम्हारे सुभटोंके साथ लड़ने के लिए तैयार हैं। सम्यक्त्व और बहिरात्माकी इस चर्चा के प्रसङ्गमे जिनराजने बन्दीसे कहा- बन्दिन्, यदि आज रणस्थली में तुमने कामका साक्षास्कार करा दिया तो तुम्हें बहुत देश, मण्डल अलङ्कार प्रौर छत्र श्रादिक पारितोषिक में दूँगा ! उत्तर में बहिरात्मा जिनराज से निवेदन करने लगा - देव. यदि आप यहाँ क्षण भरके लिए स्थिर रहें तो मैं रणाङ्गरण में प्रद तरित हुए मोहसहित कामको दिखला सकता हूँ । बहिरात्माकी इस बातसे निवंगको बड़ा क्रोध हो प्राया । वह कहने लगा - अरे नीच, तू हमारे स्वामीका इस प्रकार उपहास कर रहा है । चुप रह | अब यदि एक भी शब्द मुँह से निकाला तो मैं तेरे प्राण ले लूंगा । बन्दी कहने लगा -- अरे निर्वेग, क्या कह रहे हो ? दुनियां में ऐसा कौन है जो मेरे प्राण ले सके । निवेंगने ज्यों ही बन्दीकी बात सुनी उठकर खड़ा हो गया और बन्दीका सिर घोंटकर उसकी नाक काट डाली तथा उसे समिति - भवन के द्वारसे बाहर निकाल दिया । इस व्यवहारसे बहिरात्मा कोसे इस प्रकार जल उठा जिस प्रकार घोके पड़ने से आग भभक उठती है । यह निवेंगसे कहने लगा-निर्वेग, यदि कामके हाथसे तुझे यमलोक न पहुँचा दूँ तो तू मुझे कामदेवका द्रोही समझना । बहिरात्मा बन्दी इस प्रकार कहकर वहाँ से चल दिया |
SR No.090266
Book TitleMadan Parajay
Original Sutra AuthorNagdev
AuthorLalbahaddur Shastri
PublisherBharat Varshiya Anekant Vidwat Parishad
Publication Year
Total Pages195
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size3 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy