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________________ चक्षु कर्ण जीद स्पर्शन रसना घ्राण एकेन्द्रिय ४०० धनुष - . हीन्द्रिय ८००" ४६ धनुष श्रीन्द्रिय १६०० " १२८ " १०० १० चतुरिन्द्रिय ३२००" २५६ " । असंझी) ६४००" ५१२" ४०० " पंचेन्द्रिय) संझी) ६ योजन पोजन योजन पंचेन्द्रिय) २६५४ यो० - ०" ००० धनुष ४७२६३२ योजन १२ योजन ६३. प्रश्न : इन्द्रियों का आकार कैसा है ? उत्तर : चक्षु इन्द्रिय का आकार मसूर के समान, श्रोत्र इन्द्रिय का आकार यच-नाली के समान, घ्राण इन्द्रिय का आकार तिल के फूल समान, रसना इन्द्रिय का आकार खुरपा के समान और स्पर्शन . इन्द्रिय का आकार अनेक प्रकार का है। ६४. प्रश्न : एकेन्द्रियादि जीवों की संख्या का प्रमाण क्या है ? उत्तर : पृथ्वीकायिक, जलकायिक, अग्निकायिक और वायुकायिक जीव असंख्यातासंख्यात हैं। वनस्पतिकायिक जीव . (५०)
SR No.090245
Book TitleKarananuyoga Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPannalal Jain
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages149
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Ethics, Agam, Canon, H000, H015, & agam_related_other_literature
File Size2 MB
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