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________________ १६८ जयधवलासहिदे कसायपाहुडे [ संजमलद्धी * संजमं पडिवजमाणयस्स वि पढमसमय-अपुव्वकरणमादि कादूण जाव ताव अधापवत्तसंजदो त्ति एदम्हि काले इमेसिं पदाणमप्पाबहुभं कादव्वं । $ २३. सुगममेदं पयदप्पाबहुअपरूवणाविसयं पइण्णावक्कं । * तं जहा। $ २४. काणि ताणि पदाणि एदम्हि काले संभवंताणि जेसिमप्पाबहुअमिदमहिकीरदि त्ति पुच्छा कदा होइ । ___ * अणुभागखंडय-उक्कीरणद्धाओ जहण्णुक्कस्सियाओ हिदिखंडयउक्कीरणद्धाओ जहण्णुक्कस्सियाओ इच्चेवमादीणि पदाणि । $ २५. एत्थादिसद्देण जहण्णुकस्साबाह० जहण्णुकस्सद्विदिखंडयबंधसंतादिपदाणमण्णेसिं च पयदोवजोगीणं पदाणं गहणं कायव्वं । सुगममण्णं । * सव्वत्थोवा जहणिया अणुभागखंडयउक्कीरणद्धा । * सा चेव उक्कस्सिया विसेसाहिया। * जहणिया डिदिखंडयउकीरणद्धा हिदिबंधगद्धा च दो वि तुल्लाओ संखेजगुणाओ। * संयमको प्राप्त होनेवाले जीवके अपूर्वकरणके प्रथम समयसे लेकर अधःप्रवृत्त संयतके अन्तिम समय तक इस कालमें इन पदोंका अल्पबहुत्व करना चाहिए । $ २३. प्रकृत अल्पबहुत्वकी तरूपणाको विषय करनेवाला यह प्रतिज्ञावाक्य सुगम है। * वह जैसे। $ २४. इस कालमें सम्भव होनेवाले वे पद कौन हैं जिनका अल्पबहुत्व अधिकृत है यह इस सूत्र द्वारा पृच्छा की गई है। ___ * जघन्य और उत्कृष्ट अनुभागकाण्डक-उत्कीरणकाल तथा जघन्य और उत्कृष्ट स्थितिकाण्डक उत्कीरणकाल इत्यादि जो पद हैं उनका अल्पबहुत्व करना चाहिए । $ २५. इस सूत्रमें आये हुए 'आदि' शब्दसे जघन्य और उत्कृष्ट आबाधास्थानोंका, जघन्य और उत्कृष्ट स्थितिकाण्डकोंका, जघन्य और उत्कृष्ट बन्धपदोंका, जघन्य और उत्कृष्ट सत्कर्मपदोंका तथा प्रकृतमें उपयोगी अन्य पदोंका ग्रहण करना चाहिए। अन्य कथन सुगम है। * जघन्य अनुभागकाण्डक-उत्कीरणकाल सबसे थोड़ा है। * उत्कृष्ट वही विशेष अधिक है। * उससे जघन्य स्थितिकाण्डक-उत्कीरणकाल और स्थितिबन्धकाल ये दोनों तुल्य होकर संख्यातगुणे हैं।
SR No.090225
Book TitleKasaypahudam Part 13
Original Sutra AuthorGundharacharya
AuthorFulchandra Jain Shastri, Kailashchandra Shastri
PublisherBharatvarshiya Digambar Jain Sangh
Publication Year2000
Total Pages402
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size13 MB
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