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________________ गाथा ११५] संजदासजदे पदविसेसाणमप्पाबहुअपरूवणा १३५ गुणसेढी चेव घेत्तव्वा । तदायामो पुविल्लजहण्णद्धाहितो संखेजगुणो। कुदो एदं परिच्छिण्णं ? एदम्हादो चेव सुत्तादो ८। * जहण्णिया आबाहा संखेजगुणा । $ ६०. एयंताणुवड्डिकालचरिमसमयबंधविसए एसा घेत्तन्या' । सेसं सुगम ९। * उक्कस्सिया आवाहा संखेजगुणा । $ ६१. अपुव्वकरणपढमसमयाढत्तबंधविसए तदवलंबणादो एसा वि अंतोमुहुत्तपमाणा चेव होदूण पुविल्लादो संखेजगुणा त्ति घेत्तव्वा १० । * जहण्णयं द्विदिखंडयमसंखेजगुणं । ६६२ पविल्लमंतोमुहुत्तपमाणमेदं पुण एयंताणुवड्डिचरिमसमयविसए पलिदोवमस्स संखेज्जदिभागमेत्तं जहण्णद्विदिखंडयं गहिदं । तदो असंखेज्जगुणं जादं ११॥ * अपुव्वकरणस्स पढमं जहण्णयं द्विदिखंडयं संखेजगुणं । $ ६३. एदं पि पलिदोवमस्स संखेज्जदिमागमेत्तं चेव, किंतु पुव्विल्लादो गुणश्रणि ही लेनी चाहिए । उसका आयाम पूर्वके जघन्य कालसे संख्यातगुणा है। शंका-यह किस प्रमाणसे जाना जाता है ? समाधान-इसी सूत्रसे जाना जाता है । * उससे जघन्य आबाधा संख्यातगुणी है। $ ६०. एकान्तानुवृद्धिकालके अन्तिम समयमें होनेवाले बन्धकी यह आबाधा लेनी चाहिए । शेष कथन सुगम है ९। * उससे उत्कृष्ट आवाधा संख्यातगुणी है । ६१. अपूर्वकरणके प्रथम समयमें प्राप्त बन्धविषयक आबाधाका यहाँ अवलम्बन लिया है। यह भी अन्तर्मुहूर्तप्रमाण ही होकर पूर्वकी आबाधासे संख्यातगुणी है ऐसा ग्रहण करना चाहिए १०। * उससे जघन्य स्थितिकाण्डक असंख्यातगुणा है । ६६२. पूर्व सूत्रनिर्दिष्ट उत्कृष्ट आबाधा अन्तमुहूर्तप्रमाण है। किन्तु यह एकान्तानुवृद्धिके अन्तिम समयमें होनेवाला पल्योपमके संख्यातवें भागप्रमाण जघन्य स्थितिकाण्डक लिया गया है, इसलिए असंख्यातगुणा हो गया है ११ । * उससे अपूर्वकरणका प्रथम जघन्य स्थितिकाण्डक संख्यातगुणा है। ६६३. यह भी पल्योपमके संख्यातवें भागप्रमाण ही है। किन्तु पूर्व सूत्रनिर्दिष्ट स्थिति १. ता०प्रती एसा चेव घेत्तव्वा इति पाठः । २. ता०-आ-प्रत्योः असंखेज्जदिभागमेत्तं इति पाठः ।
SR No.090225
Book TitleKasaypahudam Part 13
Original Sutra AuthorGundharacharya
AuthorFulchandra Jain Shastri, Kailashchandra Shastri
PublisherBharatvarshiya Digambar Jain Sangh
Publication Year2000
Total Pages402
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size13 MB
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