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________________ १६४ जयधवलासहिदे कसायपाहुडे [ बंधगो ६ दुगु छाए बंधसमु०सं० डा० असंखेञ्जगुणाणि । हदसमुप्पत्तिय संक्रमट्ठा० असंखेञ्जगुणाणि । हदहदसमुप्पत्तियसंकमट्ठा० असंखेज्जगुणाणि । भयस्स बंधसमुप्पत्तियसंकमट्ठा० असंखेजगुणाणि । हदसमुप्पत्तियकमट्ठाणाणि असंखेज्जगुणाणि । हद हदसमुप्पत्तियसंकमट्ठाणाणि असंखेज्जगुणाणि । सोगस्स बंध समुप्पत्तियसंकमट्ठाणाणि असंखेञ्जगुणाणि । हदसमुपत्तियसंकभट्ठाणाणि असंखेज्जगुणाणि । हदहदसमुप्पत्तियसंकमट्ठा ० असंखेज्जगुणाणि । अरदीए बंध समुपपत्तिकमा ० असंखेञ्जगुणाणि । हदसमुप्पत्तियसंकमट्ठाणाणि असंखेज गुणाणि । हदहदसमुप्पत्तिय संक्रमडा ० असंखेञ्जगुणाणि । णत्रुंसयवेदस्त बंध समुप्पत्तिय संक्रमट्ठाणाणि असंखेज्जगुणाणि । हदसमुप्पत्तियसंकमट्ठा णाणि असंखेञ्जगुणाणि । हृदहदसमुप्पत्तियसंकमट्ठाणाणि असंखेजगुणाणि । अपच्चक्खाणमा णस्स बंध समुप्पत्तियसंकमडाणाणि असंखेञ्जगुणाणि । कोधे० विसेसाहिया ० । मायाए विसेसा० । लोभे विसेसा ० । अपच्चक्खाणमाणस्स हदसमुप्पत्तियसंकमट्टा • असंखेज्जगुणाणि । कोहे० विसेसा ० । मायाए० विसेसा० । लोभे० विसेसा० । अपच्चक्खाणमाणस्स हदहदसमुप्पत्तियसंकमट्ठाणाणि असंखेजगुणाणि । कोहे० विसे० । मायाए० विसेसा० । लोभे० विसेसा० । पच्चक्खाणमाणस्स बंधसमु० संकमट्ठा • असंखेजगुणाणि । कोहे विसे० । मायाए विसे० । उनसे हतहतसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान असंख्यातगुणे हैं। उनसे जुगुप्स के बन्धसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान असंख्यातगुणे हैं। उनसे हतसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान असंख्यातगुणे हैं। उनसे हतहतसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान असंख्यातगुणे हैं। उनसे भयके बन्धसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान असंख्यातगुणे हैं। उनसे हतसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान असंख्यातगुणे हैं। उनसे हतहतसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान असंख्यातगुणे हैं। उनसे शोकके बन्धसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान असंख्यातगुणे है । उनसे हतसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान संख्यातगुणे हैं। उनसे हतहतसमुत्पत्तिकसंक्रम स्थान असंख्यातगुणे हैं। उनसे अरतिबन्धसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान असंख्यातगुणे हैं। उनसे हतसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान असंख्यातगुणे हैं । उनसे हतहतसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान असंख्यातगुणे हैं। उनसे नपुंसक वेद के बन्धसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान असंख्यातगुणे हैं | उनसे ह्तसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान असंख्यातगुणे हैं। उनसे हतहतसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान असंख्यातगुणे हैं। उनसे अप्रत्याख्यानमानके वन्धसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान असंख्यातगुणे हैं। उनसे प्रत्याख्यानक्रोध के बन्धसमत्पत्तिक संक्रमस्थान विशेष अधिक हैं। उनसे अप्रत्याख्यानमायाके बन्धसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान विशेष अधिक हैं। उनसे अप्रत्याख्यानलोभ बन्धसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान विशेष अधिक हैं। उनसे अप्रत्याख्यानमानके हतसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान असंख्यातगुणे हैं | उनसे प्रत्याख्यानक्रोधके हतसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान विशेष अधिक हैं । उनसे अप्रत्याख्यानमायाके हतसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान विशेष अधिक हैं। उनसे अप्रत्याख्यान लोभ के हृतसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान विशेष अधिक हैं। उनसे अप्रत्याख्यानमान के हत हतसमुत्पत्तिक संक्रमस्थान असंख्यातगुणे हैं। उनसे प्रत्याख्यानक्रोधके हतहतसमुत्पत्तिकसंक्रमल्यान विशेष अधिक हैं। उनसे प्रत्याख्यानमाया के तहतसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान विशेष अधिक हैं। उनसे अप्रत्वाख्यानलोभके इतहतसमत्पत्तिकसंक्रमस्थान विशेष अधिक हैं। उनसे प्रत्याख्यानमान के बन्धसमत्यत्तिकसंक्रमस्थान असख्यातगुणे हैं। उनसे प्रत्याख्यान कोधके बन्धसमुत्पत्तिकसंक्रमस्थान विशेष 1
SR No.090221
Book TitleKasaypahudam Part 09
Original Sutra AuthorGundharacharya
AuthorFulchandra Jain Shastri, Kailashchandra Shastri
PublisherBharatvarshiya Digambar Jain Sangh
Publication Year2000
Total Pages590
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size19 MB
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