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________________ प्रथम खण्ड/प्रथम पुस्तक प्रश्न ५६ - ध्रुव के नामान्तर बताओ? उत्तर - ध्रुव, धौव्य, स्थिति, नित्य, अवस्थित । प्रश्न ५७ - उत्पात व्यय धौव्य के बारे में कुछ कहो? उत्तर - उत्पाद, व्यय धौव्य में अविनाभाव हैं । एक माग्य में होते हैं । स्वर्ग सत् का उत्पाद, सत् का व्यय या सत् का धौव्य नहीं होता किन्तु सत् की किसी पर्याय का व्यय, किसी पर्याय का उत्पाद तथा कोई पर्याय धौव्य है। प्रश्न ५८ - उत्पाद व्यय और धौव्य दोनों के मानने से क्या लाभ है ? उत्तर - धौव्य दृष्टि से वस्तु अवस्थित और उत्पाद व्यय दृष्टि से अनवस्थित है। (१९८) अन्तर अधिकार (५) प्रश्न ५९ - उत्पाद व्यय धौव्य में और सत् में क्या अन्तर है ? उत्तर - अभेद दृष्टि से सत् को गुण कहते हैं और भेद दृष्टि से उसी को उत्पाद व्यय धौव्य कहते हैं । (८७) प्रश्न ६० - सत् और द्रव्य में क्या अन्तर है ? उत्तर - भेद दृष्टि से सत् गुण और द्रव्य गुणी कहलाता है । अभेद दृष्टि से जो सत् गुण है वही द्रव्य गुणी है । (८८) प्रश्न ६१ - द्रव्य और गुण में क्या अन्तर है ? उत्तर - द्रव्य अवयवी है और प्रत्येक गुण उसका एक-एक अवयव है । प्रश्न ६२ - गुण और पर्याय में क्या अन्तर है ? उत्तर - गुण त्रिकाली शक्ति को कहते हैं और पर्याय उसके एक अविभाग प्रतिच्छेद को या एक समय के परिणमन को कहते हैं। प्रश्न ६३ - उत्पाद व्यय और धुव में क्या अन्तर है? उत्तर - धुन तो द्रव्य के स्वतःसिद्ध स्वभाव को कहते हैं और उत्पाद व्यय उसके परिणमन स्वभाव को कहते प्रश्न ६४ - व्यतिरेकी और अन्वयी में क्या अन्तर है ? उत्तर - व्यतिरेकी अनेकों को, भिन्न-भित्र को कहते हैं, ये पर्यायें है और जो अनेक होकर भी एक हों उन्हें अन्वयी कहते हैं, वे गुण हैं। प्रश्न ६५ - व्यतिरेकी और क्रमवर्ती में क्या अन्तर है ? उत्तर हैं तो दोनों एक समय की पर्याय के वाचक, पर प्रत्येक पर्याय की भिन्नता को व्यतिरेकी कहते हैं तथा पर्याय के क्रमबद्ध उत्पाद को कमवती कहते हैं । प्रश्न ६६ - व्यतिरेक और अन्वय के लक्षण बताओ? उत्तर - 'यह वह नहीं है' यह व्यतिरेक का लक्षण है तथा यह वही है' यह अन्वय का लक्षण है। प्रश्न ६७ - द्रव्य और पर्याय में क्या अन्तर है? उत्तर - स्वतःसिद्ध स्वभाव को द्रव्य कहते हैं और उसके परिणमन को पर्याय कहते हैं । नय प्रमाण अधिकार (६) प्रश्न ६८ - पर्यायार्थिक नय का विषय क्या है ? उत्तर - जो द्रव्य का भेद रूप ज्ञान करावे जैसे द्रव्य है, गुण है, पर्याय है, उत्पाद है, व्यय है, धौव्य है, सब भिन्न भित्र हैं । जो द्रव्य है वह गुण नहीं है, जो गुण है वह द्रव्य नहीं है, जो द्रव्य गुण है वह पर्याय नहीं है, जो उत्पाद है वह व्यय धौव्य नहीं है इत्यादि । (८४,८८, २४७,७४७ दूसरी पंक्ति,७४९)
SR No.090184
Book TitleGranthraj Shri Pacchadhyayi
Original Sutra AuthorAmrutchandracharya
Author
PublisherDigambar Jain Sahitya Prakashan Mandir
Publication Year
Total Pages559
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, & Religion
File Size18 MB
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