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गोम्मटसार कर्मकाण्ड-४७८ लेश्या की अपेक्षा गुणस्थानोंमें मोहनीयकर्मके उदयस्थान व प्रकृतियोंकी संदृष्टि
गुणस्थान
उदयस्थान - लेश्या x भंग ।
प्रकृति x लेश्या x भंग
मिथ्यात्व
८४६ - ४८४२४ = ११५२ ४४६ = २४४२४ = ५७६ ४४६ = २४४२४ = ५७६
सासादन मिश्र असंयत देशसंयत
८४६ = ४८४२४ = ११५२ ८४३ = २४४२४ = ५७६ ८४३ = २४४२४ = ५७६ ८४३ = २४४२४ = ५७६
६८४६ = ४०८४२४ = ९७९२ ३२४६ - १९२४२४ - ४६०८ ३२४६ - १९२४२४ - ४६०८ ६०४६ = ३६०x२४ : ८६४० ५२४३ = १५६४२४ = ३७४४ ४४४३ - १३२४२४ = ३१६८ ४४४३ = १३२४२४ = . ३१६८ २०४१ = २०४२४ ।।
प्रमत्त
४८०
१४१ ४५२ - - १२
अप्रमत्त अपूर्वकरण अनिवृत्तिकरण सवेदभाग
अवेदभाग सूक्ष्मसाम्पराय
कुलस्थान
= ५,२९७ । कुल प्रकृतियाँ
= ३८,२३७
अब सम्यक्त्वके आश्रयसे मोहनीयकर्मके उदयस्थान व प्रकृतियोंकी संख्या दो गाथाओंसे कहते हैं
अट्ठत्तरीहिं सहिया तेरसयसया हवंति उदयस्स ।
ठाणवियप्पे जाणसु सम्मत्तगुणेण मोहस्स ।।५०६ ।। अर्थ- सम्यक्त्वगुणले सहित मोहनीयकर्मके उदयस्थानोंके भेद १३७८ हैं, ऐसा जानो। नोट- प्रा. पं. स. पृ. ४८१ गा. ३९१ में २५३० भेद कहे हैं।
अद्वैव सहस्साई छव्वीसा तह य होंति णादव्वा ।
पयडीणं परिमाणं सम्मत्तगुणेण मोहस्स ।।५०७ ।। अर्थ- सम्यक्त्वगुणसे सहित मोहनीयकर्मके उदयस्थानोंकी प्रकृतियोंकी संख्या ८०२६ हैं।