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गाथा सं.
पृष्ठ सं.
७९३ १६७३ | प्रत्ययस्थानोंके प्रकार ७९४-७९८ |६७५-६८५ | बंधप्रत्ययोंमें कूटप्रकार, क्रूटोच्चारण व भंगसंख्या
|६८५ एकसंयोगी, द्विसंयोगी, त्रिमंयोगी आदि भंगसंख्या निकालनेका करणसूत्र गणित ८००-८१० ६८६-६९३ | ज्ञानावरणादि कर्मोंमें अनुभागबन्धके विशेष प्रत्यय
| महाबन्धग्रन्थानुसार प्रत्ययोंका कथन ६९५ रत्नत्रय बंधका भी और मोक्षका भी कारण है
॥ इति बंधप्रत्ययाधिकार || |
७७. भावचूलिकाधिकार
| मंगलाचरणसहित भावनरूपणा कहनेकी प्रतिज्ञा ८१२-८१९ ।६९६-७०० | औपशमिकादि पाँचभावोंका कथन ८११ टीका
जीवत्व, भव्यत्व, अभव्यत्व औदयिक है ८१९ टीका
| सिद्ध उपचारसे जीव हैं ८१९ टीका
आत्मा मूर्त या अमूर्त ८२०-८७५ ७०२-०५० ] गुणस्थान व मार्गणामें प्रत्येकग व संयोगीभंग
७५० | एकान्तमतोंका कथन, क्रियावादी आदिके भेद
| क्रियावादियोंक भेदोंकी उत्पनि ८७९
| एकान्तकालवादका लक्षण ८८२
७५२
ईश्वरकृतवाद एकान्त | ७५२ आत्मवाद एकान्त ८८२ ७५२
नियतिवाद एकान्त
स्वभाववाद एकान्त |७५२-५५३ अक्रियावादियोंके भंग |७५३ | अज्ञानवादके भंग
वनविक्रयाटियाके भंग ८९० ७५५ पुरुषार्थवाद एकान्त ८९१
दैववाद एकान्त | संयोगवाद एकान्त
८७६
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८८४-८५
८८६-८७
८८८-८९