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________________ (३८) गाथा सं. पृष्ठ सं. ७९३ १६७३ | प्रत्ययस्थानोंके प्रकार ७९४-७९८ |६७५-६८५ | बंधप्रत्ययोंमें कूटप्रकार, क्रूटोच्चारण व भंगसंख्या |६८५ एकसंयोगी, द्विसंयोगी, त्रिमंयोगी आदि भंगसंख्या निकालनेका करणसूत्र गणित ८००-८१० ६८६-६९३ | ज्ञानावरणादि कर्मोंमें अनुभागबन्धके विशेष प्रत्यय | महाबन्धग्रन्थानुसार प्रत्ययोंका कथन ६९५ रत्नत्रय बंधका भी और मोक्षका भी कारण है ॥ इति बंधप्रत्ययाधिकार || | ७७. भावचूलिकाधिकार | मंगलाचरणसहित भावनरूपणा कहनेकी प्रतिज्ञा ८१२-८१९ ।६९६-७०० | औपशमिकादि पाँचभावोंका कथन ८११ टीका जीवत्व, भव्यत्व, अभव्यत्व औदयिक है ८१९ टीका | सिद्ध उपचारसे जीव हैं ८१९ टीका आत्मा मूर्त या अमूर्त ८२०-८७५ ७०२-०५० ] गुणस्थान व मार्गणामें प्रत्येकग व संयोगीभंग ७५० | एकान्तमतोंका कथन, क्रियावादी आदिके भेद | क्रियावादियोंक भेदोंकी उत्पनि ८७९ | एकान्तकालवादका लक्षण ८८२ ७५२ ईश्वरकृतवाद एकान्त | ७५२ आत्मवाद एकान्त ८८२ ७५२ नियतिवाद एकान्त स्वभाववाद एकान्त |७५२-५५३ अक्रियावादियोंके भंग |७५३ | अज्ञानवादके भंग वनविक्रयाटियाके भंग ८९० ७५५ पुरुषार्थवाद एकान्त ८९१ दैववाद एकान्त | संयोगवाद एकान्त ८७६ او - وان د پاو | ८८४-८५ ८८६-८७ ८८८-८९
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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