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________________ पाक के प्रचपातमयमे उत्कृष्ट पपादयोगध्यान | अwnEAM RAust मूल्य निय निंद, ज्याप्त मल्म फन्दिपनि पर्याप्तक ०तषम्रा के प्रभामममयमं जयन्यापपाषषोगस्थमाचा जयन्यौकृिलंकाल कसम भवस्य के प्रभमसमय उत्कृष्टापायोगस्थार । जनमोत्कृटकाल एक्सप्रय, भादर रनिनिय आदा कान्द्रपनि पर्याप्तकलनक्षता कक्षमाममम जघन्यापपावाबाना नधन्वोत्कृष्टकार एकसमय। तबतष्य के प्रधामसमग्रम उत्कृष्टपपायर्याणाधान । अचम्पारष्टकास रकममयई दीन्द्रिप निव वर्माजक ® नवभकरमा के प्राबलपपर्ण जपन्यउपयागयोगमन जमन्योrgeकाल एकामय, हीन्दिप नि. बर्याजक ®तम के प्रममममष उत्कृष्टतपादयोगमा भन्योकृपजाल एकसमय। प्रोनिक निवृ. पपांपाक ®दमकमा के प्रयासमवम जय जपावांगस्थानी जयन्योत्कृष्टकात एकममय। जिर मित्र. पशनक ऐन्तिम गिन. पर्याप्तक सूक्ष्म एकनिंग नझय पर्याप्नवग्दसत्रमय के एपमाप्रपा जयप्रणयानयोगम्य | NATreatNAMINE सूक्ष्म परिष लाव पर्चाजाभाव के प्रपनमयष प्रकटरामायोरया । जपन्यलपान एमपपई बाहर एवं नियतमय पर्याप्नबनववत के प्रखमयपस जघन्यगायनामधार नपESTINust मादर एकन्दिप लक्ष्य पर्षान व म्ब के प्रयासमय उत्कृष्टडमवारणामान । नपन्याफटमाम समयमय रे दीनियसम्म पर्याजक नभयान के प्रबपमपापं नवयापपानयोगम्मान । तपोभवान डीनियम पन व म्ब के प्रथमतपय मकृष्टापायांगाग्राम जपन्यांफमकाम एकालपी प्रान्तिय सम्म प्राप्तक Oचावम्ब के प्रखपमपम अवन्यपणनफजियान । जसत्यकृरलाल एकपप्पो विजय On के मसाष फष्टाम्पादयोगाभ्यार मका घन्टिय सभ्य नागफ ®जपा के प्रवपमण्य जपन्याटपपारपोरखना जपन्याकरतात एकात्म्य अनुजिम लय पर्याजक 0 नाथ के प्रशासमय कृपापणावांगवार जय-सामान एका पंच. अरजी लम्प पर्याप्तका के प्रमपमयम जपन्यपणापोरवान। जम्न्याष्टफान एक्सपय। पंचे अंजी लामा पाप्तक ® तनमान के प्रभसप्तमयमें उत्कृष्ट उपमानयोगाथा । नत्रयांकरकान रकममय है, पो. संजीतन्य पोजक शवमा के प्रययममय जमन्यापागारमान वान्यान्कृषकम काम ..... पं मंजी लक्ष्मपणांप्जक नदमपाट के पापमपम जन्मष्टापरनयंगाधान । जघन्यांकटमाट गमय है Janmantitathaane | Ministhatak ANAMIRMeanLD PhhreheumatherineTHIRajaxnhEaahetnamenianR Pasan Mathuaene | timentantaharinee mandu@ Revidate LAHARITRACTeepKANER NARAMO nahanee iapna hryanune .... Ejaniy' WH .... नभयस्थ कं प्रवपयमय उत्कृपापपाग्योणधान । जन्मोत्कृएकाल एकया। नपराम्ब के प्रश्चपमपमपं जघन्यापपाइयांगम्बान । जमन्यात्कृष्टकाम एकमपय । ..... मंत्री पंच निव पर्यानक ..... गंजी पंच निय, नर्यातक HiritinyhEternitinde j a म पफांजय लज्यपर्याप्तके जमन्य एकान्ताराज्ञियो स्थान & BEmilthyAEIPRnia arketinakaithal- मुस्म पन्जिय लमयपप्तिके उत्कृष्ट एकाजामुहियोगम्थान @ @anuarjFFILahanepaniey AIDपकन्द्रिम लापपर्याप्त जन्म एकान्तानुदियो स्थान : @ HIshaakar kinan khneyamitrADवादर पकान्द्रय ललवपांजके उत्कृष्ट एकान्तानुसाढयोतम्धान S ART . सूक्षा एवंन्द्रिम सम्यापक जयन्य परिणामयापम्यान * मूक्ष्म एकेन्टिय लक्ष्यपर्याप्नके उत्कृष्ट परिणामयोगम्थान वादा एकोन्जय लयपर्याप्तके जघन्य परिणामयोगस्थान® Dबान एकनिष मलयपरके उत्कृट परिणामयांगवान 1अन्तर • सुक्ष्म एन्टिय नि. पर्याप्नक जान्य अष्टपरिणामयोगम्धान 0 सक्ष्म एकन्द्रिय नि. पर्याप्नके उत्कृष्ट उत्कृष्टपरिणामयोगस्थान 0 वादर एकन्टिय नि. पप्तिके जबज्य उत्कृष्टपरिणामयोगस्थान @ बादर एकन्टिय नि. पयोजक कृष्ट रत्कृष्टपरिणामयागस्थान 0 अन्तर ट्रीशियमयपपिके जपन्यएकान्तानुडियागस्थान दीन्दिय नब्यपर्याप्तके उत्कृष्टएकानानुवियोगस्थान चौन्टिय लबबाप्तकं जपत्याएकान्तामुनियोगस्थान . जीन्दिय लावपर्याप्तके उत्कृष्टएकानानुदिपम्यान @ चतुरिन्द्रिय लज्यपातके अंघन्धरकान्नानुवृद्धियोगस्थान 0 चनिनिय लमयपीनके उत्कृष्टएकान्नानुनियागस्थान .. अमजी पंचे. तवयाप्नक मंघन्यएकनानुद्धियोगम्यान ....असंही पंचे, तनपान के प्राकृष्टएकान्तानुवडियोगधा40 .....मजी पंचे. लकमपात अन्य एकानापूर्तियोगम्थान 0 ....संजी पंत्रे. लध्यपानके उत्कृष्एकान्नानुनिषोगान ॐ 0000000003 अन्तर दीन्द्रिय सभ्यपणके जमन्याषणामयोगस्थान हीन्द्रिय सहयपर्वाष्टके उत्कृष्टपरिणामपोगाम्यान जीनिय लब्ध्यपर्याप्न के जयपरिक्षापयोगस्थान श्रीनिय लक्ष्यपान के सत्कृष्टपरिणामपोगान चनुरिन्निय लपम्पपर्याप्तके जघन्मपरिपापियोगस्थान अनुरिन्दिम पर्याप्ती कृष्परिणापयोगस्थान .. अमेज़ी रखे. लवपर्याप्तक जघन्यपरिमामयोगस्थान .... असंजी पंचे. सबयपप्तिके उत्कृष्टपरिणामयेगस्थान 0 ....मंजो पंचे. लब्ध्यपयांजके जवयंचरिणामषाणस्थान ....मंज्ञी पंच. लब्ध्यपयांजके उत्कृष्टपरिणामयोगस्थान 0000000000 /अन्तर SODacec800 नि.पर्याप्तक जघन्य एकान्नानुद्धियोगम्धान जीन्द्रिय . पर्याप्जक उत्कृष्ट एकान्तानुवृद्धि योगस्थान श्रीन्दियनि श्रीनिम नि पर्याप्तके जमेन्ध एकान्तानुवनियोगस्थान श्रीनियन पर्याप्त मष्ट एकानानुषि योगरधान परिन्द्रिय नि, पर्याप्त जगन्य एकान्तानुद्धि पोगरधान चतुरनिय नि. पर्याप्तके उत्कृष्ट एकान्तानुवरियागस्थान . असंजी पंचे.नि. पर्याप्तके जघन्य एकान्तानुवद्धि योगस्थान .असंही पं. नि. पर्याप्नके उत्कृष्ट एकान्नानुडियोगधाम • मजा पर नि.पजिक जपन्य एकालानुपतियागरधान ا" عطلها عدة تعلنطقية ململا .. فهلي م नि. पर्याप्त मान्यपरिणाम बोगरधान दादथ . पांज समयपरिणाम यांगरधान जीनियनि चतुरिन्तिम नि. पयाप्तके जघन्यरिणाम योगस्थान अमंजी. नि. पर्याप्तकं अनन्यपरिणाम यांगस्थान .... संजी..नि. क्याप्तके जम्बन्धपरिणाम घागस्थान हीन्नियन, पर्याप्नक मत्कृष्टपरिणाप चांगस्थान श्रीन्सि लि. पर्याप्नके माकृष्टरिणाम पांगवार • चतुरिनिय नि. पर्याप्त सकृष्टरिणाम बोगस्थान अमेजी पो. नि. पर्याप्त प्रकृष्टगणाम पांगवान @ ....संशी पंथन. पर्मानक कष्टमारणाप पोगाथा . .
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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