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________________ गोम्मटसार कर्मकाण्ड-१९६ असञ्जीपञ्चेन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका उघन्यएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा, उससे संज्ञीपंचेन्द्रिय लिब्ध्यिपपासक को धन्धरकान्ता वृसियोग असंख्यातगुणा, उससे द्वीन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका उत्कृष्टएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा, उससे त्रीन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका उत्कृष्टएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा, उससे चतुरिन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका उत्कृष्टएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा,उससे असञ्जीपञ्चेन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका उत्कृष्ट एकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा, उससे सञ्जीपञ्चेन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका उत्कृष्टएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा है ॥२३९।। इससे आगे श्रेणी के असंख्यातवेंभागमात्र योगस्थानोंका अन्तर करके द्वीन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका जघन्यपरिणामयोग असंख्यातगुणा, उसने त्रीन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका जघन्यपरिणामयोग असंख्यातगुणा, उससे चतुरिन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका जघन्यपरिणामयोग असंख्यातगुणा, उससे असञीपञ्चेन्द्रिय लब्ध्यपर्याप्तकका जघन्यपरिणामयोग असंख्यातगुणा, उससे सञ्जीपञ्चेन्द्रियलब्ध्य पर्याप्तकका जघन्यपरिणामयोग असंख्यातगुणा है। उससे द्वीन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका उत्कृष्टपरिणामयोग असंख्यातगुणा, उससे त्रीन्द्रिय लब्ध्यपर्याप्तकका उत्कृष्टपरिणामयोग असंख्यातगुणा, उससे चतुरिन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका उत्कृष्टपरिणामयोग असंख्यातगुणा है, उससे असझी पञ्चेन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका उत्कृष्ट परिणामयोग असंख्यातगुणा है, उससे संज्ञी पंचेन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तक का उत्कृष्ट परिणाम योग असंख्यातगुणा है। इससे आगे श्रेणी के असंख्यातवेंभागमात्र योगस्थानों का अन्तर करके द्वीन्द्रियनिर्वृत्त्यपर्याप्तकका जघन्यएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा, उससे त्रीन्द्रियनिर्वृत्त्यपर्याप्तकका जघन्यएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा, उससे चतुरिन्द्रियनिर्वृत्त्यपर्याप्तकका जघन्यएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा, उससे असंज्ञी पञ्चेन्द्रियनिर्वृत्त्यपर्याप्तक का जघन्य एकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा है। उससे सञीपञ्चेन्द्रियनिर्वृत्त्यपर्याप्तकका जघन्यएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा, उससे द्वीन्द्रियनिर्वृत्त्यपर्याप्तकका उत्कृष्टएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा, उससे त्रीन्द्रियनिर्वृत्त्यपर्याप्तकका उत्कृष्टएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा, उससे चतुरिन्द्रियनिवृत्त्यपर्याप्तकका उत्कृष्टएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा है, उससे असञ्जीपञ्चेन्द्रियनिर्वृत्त्यपर्याप्तकका उत्कृष्टएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा, उससे सीपञ्चेन्द्रिय निर्वृत्त्यपर्याप्तकका उत्कृष्टएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा है। इससे आगे श्रेणी के असंख्यातवेंभागमात्र योगस्थानों का अन्तर होकर द्वीन्द्रियनिवृत्तिपर्याप्तकका जघन्यपरिणामयोग असंख्यातगुणा, उससे त्रीन्द्रियनिर्वृत्तिपर्याप्तकका जघन्यपरिणामयोग असंख्यातगुणा है, उससे चतुरिन्द्रियनिर्वृत्तिपर्याप्तकका जघन्यपरिणामयोग असंख्यातगुणा,उससे असञीपञ्चेन्द्रियनिर्वृत्तिपर्याप्तकका जघन्यपरिणामयोग असंख्यातगुणा, उससे सञ्जीपञ्चेन्द्रियनिर्वृत्तिपर्याप्तकका जघन्यपरिणामयोग असंख्यातगुणा, उससे द्वीन्द्रियनिर्वृत्तिपर्याप्तकका उत्कृष्टपरिणामयोग असंख्यातगुणा, उससे त्रीन्द्रियनिर्वृत्तिपर्याप्तकका उत्कृष्टपरिणामयोग असंख्यातगुणा, उससे चतुरिन्द्रियनिर्वृत्तिपर्याप्तकका १. धवल पुस्तक १० पृ. ४१७
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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