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________________ गोम्मटसार कर्मकाण्ड-१९५ चतुरिन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकके उत्कृष्टउपपादयोगकी अपेक्षा असञ्जीपञ्चेन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका जघन्यउपपादयोग असंख्यातगुणा, उससे चतुरिन्द्रियनिर्वृत्त्यपर्याप्तकका उत्कृष्टउपपादयोग असंख्यातगुणा है, उससे असञ्जीपञ्चेन्द्रियनिर्वृत्त्यपर्याप्तक का जघन्यउपपादयोग असंख्यातगुणा, उससे असञ्जीपञ्चेन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तक का उत्कृष्ट उपपाद योग असंख्यातगुणा है, उससे सञ्जीपञ्चेन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तक का जघन्य उपपादयोग असंख्यातगुणा, उससे सञ्जीपञ्चेन्द्रियनिर्वृत्त्यपर्याप्तकका जघन्यउपपादयोग असंख्यातगुणा, उससे असंज्ञीपंचेन्द्रिय निर्वृत्त्यपर्याप्तक का उत्कृष्ट उपपादयोग अंख्यातगुणा, उससे सञ्जीपञ्चेन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका उत्कृष्टउपपादयोग असंख्यातगुणा और उससे सूक्ष्म एकेन्द्रिय लब्ध्यपर्याप्तकका जघन्यएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा है ।२३६॥ सूक्ष्मएकेन्द्रिय लब्ध्यपर्याप्तकके जघन्यएकान्तानुवृद्धियोग से सञीपञ्चेन्द्रियनिवृत्त्यपर्याप्तकका उत्कृष्टउपपादयोग असंख्यातगुणा,उससे सूक्ष्मएकेन्द्रियनिवृत्त्यपर्याप्तकका जघन्यएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा, उससे बादरएकेन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका जधन्यएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा और उससे बादरएकेन्द्रियनिर्वृत्यपर्याप्तकका जघन्यएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा है। बादरएकेन्द्रियनिवृत्त्यपर्याप्तकके जघन्यएकान्तानुवृद्धियोगकी अपेक्षा सूक्ष्मएके न्द्रिय लब्ध्यपर्याप्तकका उत्कृष्टएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा, उससे सूक्ष्मएकेन्द्रियनिवृत्त्यपर्याप्तकका उत्कृष्टएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा, उससे बादरएकेन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका उत्कृष्टएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा, उससे बादरएकेन्द्रियनिर्वृत्त्यपर्याप्तकका उत्कृष्टएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा है। उससे आगे श्रेणी के असंख्यातवें भागमात्र योगस्थानोंका अन्तर करके सूक्ष्मएकेन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका जघन्यपरिणामयोग असंख्यातगुणा उससे बादरएकेन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका जघन्यपरिणामयोग असंख्यातगुणा, उससे सूक्ष्मएकेन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका उत्कृष्टपरिणामयोग असंख्यातगुणा और उससे बादरएकेन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका उत्कृष्टपरिणामयोग असंख्यातगुणा है ॥२३८|| उससे आगे श्रेणी के असंख्यातवेंभागमात्र अन्तर होकर सूक्ष्मएकेन्द्रियनिर्वृत्तिपर्याप्तकका जघन्यपरिणामयोग असंख्यातगुणा, उससे बादरएकेन्द्रियनिर्वृत्तिपर्याप्तकका जघन्यपरिणामयोग असंख्यातगुणा, उससे सूक्ष्मएकेन्द्रियनिर्वृत्तिपर्याप्तकका उत्कृष्टपरिणामयोग असंख्यातगुणा, उससे बादरएकेन्द्रियनिर्वृत्तिपर्याप्तकका उत्कृष्टपरिणामयोग असंख्यातगुणा है। इसके आगे श्रेणी के असंख्यातवेंभागमात्र अन्तर होकर द्वीन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका जघन्यएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा, उससे त्रीन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तक का जघन्यएकान्तानु वृद्धियोग असंख्यातगुणा है, उससे चतुरिन्द्रियलब्ध्यपर्याप्तकका जघन्यएकान्तानुवृद्धियोग असंख्यातगुणा है। उससे १. धवल पु. १० पृ. ४१५-४१६ २. धवल पु. १० पृ. ४१६
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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