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________________ ६१२/गो. सा. जीवकाण्ड गाथा ५४०-५४६ मारणान्तिक समुद्घात की अपेक्षा नौ बटे चौदह (1) भाग स्पृष्ट है क्योंकि मेरतल से नीने दो राजुओं के साथ ऊपर सात राजू स्पर्शन पाया जाता है ।' उपपाद की अपेक्षा तेजो लेश्यावाले जीवों द्वारा प्रतीत काल में कुछ कम डेढ़ बटे चौदह (१) भाग स्पृष्ट है ।।२०२।। क्योंकि मेरुमूल से डेढ़ राजू मात्र ऊपर चढ़कर प्रभा पटल का अवस्थान है। शंका--सानत्कुमार माहेन्द्र कल्पों के प्रथम इन्द्रक विमान में स्थित तेजो लेश्यावाले देवों में उत्पन्न कराने पर डेढ़ राजू से अधिक क्षेत्र क्यों नहीं पाया जाता? सदा --हो, क्योंकि सीधर्मकनप से थोड़ा ही स्थान ऊपर जाकर सानत्वमार कल्प का प्रथम पटल अवस्थित है। शंका-यह कैसे जाना जाता है ? समाधान-क्योंकि, ऐसा न मानने पर उपयुक्त डेढ़ राज क्षेत्र में जो कुछ न्यूनता बतलाई है वह नहीं हो सकती। पपलेश्या और शुक्ल लेश्या का स्पर्शन पम्मस्स य सवारणसमुग्धाददुगेसु होदि पढमपदं । प्रड चोइस भागा वा देसूरणा होति रिणयमेण ।।५४८।। उववादे पढमपदं पणचोदसभागयं च देसूणं । सुक्कस्स य तिवाणे पढमो छच्चोदसा हीरगा ॥५४६।। गाथार्थ-पद्मलेश्या वाले जीवों ने स्वस्थान की अपेक्षा प्रथम पद (लोक का असंध्यातवां भाग) स्पर्शन किया है। समुद्घात की अपेक्षा कुछ कम पाठ बटे चौदह (१) भाग स्पर्श किया है ।।५४८।। उपपाद पदगत जीवों ने प्रथमपद (लोक का असंख्यातवाँ भाग) अथवा कुछ कम पाँच बटा चौदह भाग (१४) स्पर्श किया है। शुक्ललेश्यावालों ने तीन स्थानों में प्रथम पद व कुछ कम छह बटा चौदह (1) भाग स्पर्ण किया है ।।५४६।। विशेषार्थ- पालेण्यावाले जीवों ने स्वस्थान और समुद्घात पदों से लोक का असंख्यातदाँ भाग स्पर्श किया है अथवा अतीत काल की अपेक्षा बुछ कम प्राट बटे चौदह (६) भाग स्पर्श विया है ।३२०३-२०५।। खुलासा इस प्रकार है- स्वस्थान स्वस्थान पद की अपेक्षा तीन लोकों के असंख्यातवें भाग, तिर्यग्लोक के संख्यातवें भाग और प्रहाई दीप से असंख्यात गुरणे क्षेत्र का स्पर्श किया है। १. धवल पु. ७ पृ. ४२६-४४० । २. धवल पु. ५ पृ. ४४० । ३. धवल पु. ७ पृ. ४.४७ । ४. घबल इ."
SR No.090177
Book TitleGommatsara Jivkand
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherRaghunath Jain Shodh Sansthan Jodhpur
Publication Year
Total Pages833
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, Religion, & Principle
File Size22 MB
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