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________________ उक्त नक्शे का विशेष स्पष्टीकरण जल त्रुलि 4 पृथ्वी ! शिला ० ज तक उ. से ०० ० ० ज तक द HA ० 5 दु Our Ow ~ मध्यम शुक्ल तथा उत्कृष्ट शुक्ल ******.. 14-RARE मध्यम शुक्ल लेश्या *44*+ उत्कृष्ट पद्म जमन्य शुक्ल कृष्ण १ ******** **.**. WAT Weed... Well » जघन्य कापोत तथा मध्यम तीन शुभ ******** ज. नील तथा कृष्णारहित शेष ४ मध्यम HE FINE ALL ********* w ज. कृष्ण तथा शेष ५ लेश्या मध्यम *****.... ...AREE ----- कृष्णादि ५ मध्यम तथा जयम्य शुक्ल ******** ******* कु. नी. का. वी मध्यम जघन्य पच ..... • मध्यमकृष्ण 10 * कृ.नी. का. मध्यम जघन्य पीत ********th H... मध्यम कृष्ण 4*14 day P.LINK ------ उत्कृष्ट कृष्ण कृष्ण, नील, मध्यम उत्कृष्ट कापोत .... CNN DUTE NAR मध्यम कृष्ण उत्कृष्ट नील ***Ver .... PERTINENAD.... ० - प्रबन्ध ० प्रबन्ध ० = प्रबन्ध ए J Ar " de देवापु देवायु देवायु > चारों आयु न. दिना प्रा. ल.म.दे.प्रा.० x M * चारों प्रायु चारों भावु • चारों आयु लरका " न ति श्रायु नति म.प्रायु 효리님으로 보 ० प्रवन्ध == = • = R+K Fla " | " ० ० C C G M ሱ श्राठ मध्यमांत
SR No.090177
Book TitleGommatsara Jivkand
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherRaghunath Jain Shodh Sansthan Jodhpur
Publication Year
Total Pages833
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, Religion, & Principle
File Size22 MB
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