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________________ गाथा १०१ जीवसमास/१४५ अंगुल का असंख्यातबाँभाग है। ४३. उसके ही निवृत्तिपर्याप्तक की उत्कृष्ट अवगाहना उससे विशेष अधिक है। विशेष अधिक का प्रमाण अंगुल का असंख्यातवाँभाग है। ४४. उससे बादरनिगोद निर्वृत्तिपर्याप्तक की जघन्य अवगाहना असंख्यातगुणी है । गुणकार पल्योपम का असंख्याताभाग है । ४५. उससे उसके ही नित्यपर्याप्तक की उत्कृष्ट अवगाहना विशेष अधिक है। विशेष अधिक का प्रमाण अंगुल का असंख्यातवांभाग है। ४६. उससे उसके ही नित्तिपर्यापतक की उत्कृष्ट अवगाहना विशेष अधिक है। विशेष अधिक का प्रमाण अंगुल का असंख्याताभाग है। ४७. उससे निगोद प्रतिष्ठितपर्याप्तक की जघन्य अवगाहना असंख्यातगुणी है। गुणकार पल्योपम का असंख्यातवाँभाग है। ४८. उससे उसके ही निर्वत्यपर्याप्तक की उत्कृष्ट प्रवगाहना विशेष अधिक है। विशेष अधिक का प्रमाण अंगुल के प्रसंन्यातवें भाग है। ४६. उससे उसके ही नित्तिपर्याप्तक की उत्कृष्ट अवगाहना विशेष अधिक है। विशेष अधिक का प्रमाण अंगुल के असंख्यातवेंभाग प्रमाण है। ५.०. उससे बादर बनस्पतिकायिक प्रत्येकशरीर निवृत्तिपर्याप्तक की जघन्य अवगाहना असंख्यातगुणी है। गुणकार का प्रमाण पल्योपमा मालवाला जब हीकिय नितिपर्याप्तक की जघन्य अवगाहना - संख्यातगुणी है । गुणकार का प्रमाण पल्योपम का असंख्याताभाग है । ५२. उससे त्रीन्द्रिय निर्वृत्तिपर्याप्नक की जघन्य अवगाहना संख्यातगुणी है। गुणकार संख्यात समय है । ५३. उससे चतुरिन्द्रिय । निर्वृत्तिपर्याप्तक की जघन्य अवगाहना संख्यातगुणी है। गुणकार का प्रमाण संख्यात समय है। ५४. उससे पंचेन्द्रिय निर्वृतिपर्याप्तक की जघन्य अवगाहना संख्यातगुणी है। गुणकार संख्यात समय है । ५५. उससे श्रीन्द्रिय नित्यपर्याप्तक की उत्कृष्ट अवगाहना संख्यातगुरणी है। गृणकार संख्यातसमय । है। ५६. उससे चतुरिन्द्रिय नित्यपर्याप्तक की उत्कृष्ट अवगाह्ना संख्यातगुरणी है । गुणाकार का । प्रमाण संख्याससमय है। ५७. उससे द्वीन्द्रिय निर्वत्यपर्याप्तक की उत्कृष्ट अवगाहना संख्यातगुणी है। गुणकार संख्यात समय है। ५८. उससे बादर वनस्पति कायिक प्रत्येक शरीर नित्यपर्यास्तक की उत्कृष्ट अवगाहना संख्यातगुणी है। गुणकार संख्यात समय है। ५६. उससे पंचेन्द्रिय निर्वत्यपर्याप्तक की उत्कृष्ट अवगाहना संख्यातगुणी है । गुणकार संख्यात समय है। ६०. उससे त्रीन्द्रिय निर्वृतिपर्याप्तक की उत्कृष्ट प्रवगाहना संख्यातगुरणी है। गुणकार संख्यातसमय है । ६१. उससे चतुरिन्द्रिय निवृत्तिपर्याप्तक की उत्कृष्ट अवगाहना संस्थातगुणी है। गुरग कार संख्यातसमय है। ६२. उससे द्वीन्द्रिय निर्वृतिपर्याप्तक की उत्कृष्ट अवगाहना संख्यातगुणी है। गुरगकार संख्यात समय है। ६३. उससे बादरवनस्पतिकायिक प्रत्येक शरीर निवृत्तिपरितक की उत्कृष्ट अवगाहना संख्यातगुरणी है। गुरणकार संख्यातसमय है। ६४. उमसे पंचेन्द्रिय निर्वृतिपर्याप्तक की उत्कृष्ट अवगाहना संख्यात गुणी है । गुणकार संश्यात समय है ।' गुगण काररूप असंख्यात का और श्रेगिगत २२ स्थानों में अधिक का प्रमाण सुहभेवरगुरणगारो प्रावलिपल्ला असंखभागो दु । सट्ठाणे सेढिगया अहिया तत्थेक पडिभागो ॥१०॥ गाथार्थ- स्वस्थान सुक्ष्य और बादरों का गुणकार क्रम से आवली का असंख्यातवाँभाग और पत्य का असंख्यात बाँभाग है, किन्तु श्रेणीगत स्थान एक प्रतिभाग प्रमाण विशेष अधिक है ।।१०११॥ विशेषार्थ- इस गाथा में प्रतिपादित विषय ध.पु. ११ सूत्र ५ से १६ में प्रतिपादित १. घ.पु. ११ पृ. ५६-६६ सूत्र ३१-१४ ।
SR No.090177
Book TitleGommatsara Jivkand
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherRaghunath Jain Shodh Sansthan Jodhpur
Publication Year
Total Pages833
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, Religion, & Principle
File Size22 MB
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