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________________ सूत्र १०६२ तिर्यक् लोक : नक्षत्रों के देवता गणितानुयोग ५६५ १४. ५०–ता पुणव्वसू णक्खत्ते कि देवयाए पण्णत्ते ? उ०--अदितिदेवयाए पण्णत्ते, १५. ५०–ता पुस्से णक्खत्ते कि देवयाए पण्णत्ते ? उ०बहस्सइ देवयाए पण्णत्ते, १६. ता अस्सेसा णक्खत्ते कि देवयाए पण्णत्ते? ' उ०–सप्पदेवयाए पण्णत्ते, १७. ५०–ता महा णक्खत्ते किं देवयाए पण्णत्ते ? उ०—पिति देवयाए' पण्णत्ते, १८. ५०–ता पुव्वाफग्गुणी णक्खत्ते कि देवयाए पण्णत्ते ? उ०-भगदेवयाए पण्णत्ते, १९. ५०–ता उत्तराफग्गुणी णक्खत्ते कि देवयाए पण्णत्ते ? उ०-अज्जम देवयाए पण्णत्ते, २०.५०-ता हत्थे णक्खत्ते कि देवयाए पण्णत्त ? उ०-सुविया देवयाए' पण्णते, २१. ५०–ता चित्ता णक्खत्ते कि देवयाए पण्णते ? उ०-तटुदेवयाए पण्णत्ते, २२. ५०-ता साती णक्खत्ते कि देवयाए पण्णते? ___ उ०-वाउदेवयाए पण्णत्ते, २३. ५०–ता विसाहा णक्खत्ते कि देवयाए पण्णते? (१४) प्र०-पुनर्वसु नक्षत्र का कौनसा देवता कहा गया है ? उ०- अदिति देवता कहा गया है । (१५) प्र०-पुष्य नक्षत्र का कौनसा देवता कहा गया है ? उ०-बृहस्पति देवता कहा गया है। (१६) प्र०-अश्लेषा नक्षत्र का कौनसा देवता कहा गया है ? उ०-सर्प देवता कहा गया है । (१७) प्र०-मघा नक्षत्र का कौनसा देवता कहा गया है ? उ०—पितृ देवता कहा गया है। (१८) प्र०-पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का कौनसा देवता कहा गया है? उ०-भग देवता कहा गया है। (१६) प्र०-उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का कौनसा देवता कहा गया है। उ०-अर्यमा देवता कहा गया है । (२०) प्र०-हस्त नक्षत्र का कौनसा देवता कहा गया है ? उ०-सविता देवता कहा गया है । (२१) प्र०-चित्रा नक्षत्र का कौनसा देवता कहा गया है ? 30-त्वष्टा देवता कहा गया है। (२२) प्र०-स्वाती नक्षत्र का कौनसा देवता कहा गया है ? उ०-वायु देवता कहा गया है। (२३) प्र०-विशाखा नक्षत्र का कौनसा देवता कहा गया है ? उ०-इन्द्राग्नि देवता कहा गया है। (२४) प्र०-अनुराधा नक्षत्र का कौनसा देवता कहा गया है? उ०-मित्र देवता कहा गया है। (२५) प्र०-ज्येष्ठा नक्षत्र का कौनसा देवता कहा गया है ? उ०- इन्द्र देवता कहा गया है । (२६) प्र०-मूल नक्षत्र का कौनसा देवता कहा गया है ? उ०-नैऋत देवता कहा गया है । उ०-इंदग्गीदेवयाए पण्णत्ते, २४. ५०-ता अणुराहा णक्खत्ते कि देवयाए पण्णते ? उ०-मित्तदेवयाए पण्णते, २५. ५०–ता जेट्ठा णक्खत्ते कि देवयाए पण्णते? उ०-इंद देवयाए पण्णत्ते, २६. ५०–ता मूले णक्खत्ते कि देवयाए पण्णत्ते? उ०—णिरइदेवयाए' पण्णत्ते, २ अर्यमा-अर्यम नामको देव विशेषः । ४ त्वष्टा-त्वष्ट नामको देवस्तेन त्वाष्ट्री-चित्रा इति प्रसिद्धम् । १ पितृनामा देव । ३ सविता-सूर्य । ५ (क) विशाखा-द्विदैवतमिति प्रसिद्धिम् । ६ नैऋतः-राक्षसस्तेनमूल, आस्रप इति प्रसिद्धम् ।
SR No.090173
Book TitleGanitanuyoga
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj, Dalsukh Malvania
PublisherAgam Anuyog Prakashan
Publication Year1986
Total Pages1024
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Mathematics, Agam, Canon, Maths, & agam_related_other_literature
File Size34 MB
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