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तत्पश्चात् जब शेष चार अघातिया कर्मों का क्षरण हो जावेगा तब तू मोक्ष अर्थात् शिव स्थान पर जाकर अनन्त सुख को अनन्त काल तक भोगेगा। धानतराय कहते हैं कि सम्यकदर्शन की महिमा यह ही है कि इससे भव-भ्रमण की सीमा सीमित होती जाती है।
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द्यानत भजन सौरभ