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________________ 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 $1 52 53 54 55 56 57 58 [दव्यसंग्रह भावास्त्र एवं द्रव्यास्रव का लक्षण भावासन के भेद द्रव्यास्त्रव का लक्षण द्विविध बन्ध का स्वरूप बन्ध के चार भेद द्विविध संवर का स्वरूप भावसंवर के भेद निर्जरा के भेद तथा लक्षण द्विविध भो पुण्य और पाप का लक्षण व्यवहार एवं निश्चय मोक्षमार्ग का स्वरूप रत्नत्रय युक्त आत्मा ही मोक्ष का कारण सम्यग्दर्शन का स्वरूप सम्यग्ज्ञान का स्वरूप दर्शनोपयोग का स्वरूप दर्शनोपयोग और ज्ञानोपयोग की प्रवृत्ति का क्रम व्यवहार चारित्र का स्वरूप निश्चय चारित्र का स्वरूप ध्यान की प्रेरणा ध्यान के उपाय ध्यान करने योग्य मन्त्र अरिहन्त परमेष्ठी का स्वरूप सिद्ध परमेष्ठी का स्वरूप आचार्य परमेष्ठी का स्वरूप उपाध्याय परमेष्ठी का स्वरूप साधु परमेष्ठी का स्वरूप ध्यान- ध्याता - ध्येय का स्वरूप परम ध्यान का स्वरूप ध्यान के उपाय ग्रंथ का उपसंहार 3 5 3 3 的 61 63 65 65 68 69 FRA R R Na 71 73 74 75 76 77 78 80 81 83 84 85 86 87 89 90 91 92 93 95 96 97 99 石鮮
SR No.090129
Book TitleDravyasangrah
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandramuni
PublisherBharatkumar Indarchand Papdiwal
Publication Year2000
Total Pages121
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, & Religion
File Size2 MB
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