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________________ दशाश्रुतस्कन्धनियुक्ति : एक अध्ययन गाथायें अतिरिक्त हैं। नि०भा० में इनका क्रमाङ्क ३१५५, ३१७०, ३१७५, ३१९२ और ३२०९ है। इन अतिरिक्त गाथाओं का क्रम द०नि० में गाथा सं० क्रमश: ६८, ८२, ८६,१०१ एवं १०९ के बाद आता है। नि०मा० में उल्लिखित अतिरिक्त गाथायें निम्न हैं - पण्णासा पाडिज्जति, चउण्ह मासाण माओ । ततो उ सत्तरी होइ, जहण्णो वासुवग्गहो ।।३१५५।। विगतीए गहणम्मि वि, गरहितविगतिग्गहो व कज्जम्मि । गरहा लाभपमाणे, पच्चयपावप्पडीघातो ।।३१७०।। डगलच्छारे लेवे, छाण गहणे तहेव धरणे य। पुंछण-गिलाण-मत्तग, भायण भंगाति हेतू से।।३१७५।। चउसु कतालेस गती, नरय तिरिय माणुसे य देवगती । उवसमह णिच्चकालं, सोग्गइमग्गं वियाणंता ।।३१९२।। असिवे ओमोयरिए, रायदुढे भए व गेलण्णे। अद्धाण रोहए वा, दोसु वि सुत्तेसु अप्पबहुं ।।३२०९।। इस सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि द०० (भावनगर) में ऊपर उल्लिखित गाथा सं०६८ एवं ८६ की चूर्णि के रूप में प्राप्त विवरण में नि०भा०चू० के समान ही गाथा संख्या ३१५५ और ३१७५ की चूर्णि भी प्राप्त होती है। गाथा सं० ८२ के अंश नि०भा० की ३१६९ और ३१७० दोनों गाथाओं में प्राप्त होते हैं। ८२ की चूर्णि भी नि०भा०५० की इन दोनों गाथाओं की समन्वित चूर्णियों के समान है। जबकि गाथा सं० १०१ की चूर्णि के साथ नि०भा० ३१९२ की चूर्णि और ११८ की चूर्णि के साथ ३२०९ की चूर्णि द०चू० में प्राप्त नहीं होती है। तथ्य को स्पष्ट करने के लिए दोनों चूर्णियों के सम्बद्ध अंश को यहाँ उद्धृत किया जा रहा है___ "कहं पुण सत्तरी? चउण्हं मासाणं सवीसं दिवससतं भवति, ततो सवीसतिरातोमासोपण्णासंदिवसा सोधिता सेसा सत्तरिंदिवसा।जे महवयबाहुलस्स दसमीए पजोसवेति तेसिं असीति दिवसाजेट्ठोग्गहो, जे सावणपुनिमाए पजोसर्विति तेसिंणंणउत्ति दिवसा मझिंजेडोग्गहो, जे सावणबहुलदसमीए ठिता तेसिं दसुत्तरं दिवससतंजेटोग्गहो, एवमादीहिंपगारेहिं वरिसारत्तंएगखेते अच्छित्ता कत्तियचाउम्मासिए णिगंतव्वं। अथ वासो न ओरमति तो मग्गसिरे मासे जहिवसं पक्कमट्टियं जातं तदिवसंचेवणिग्गंतव्यं, उक्कोसेण तिन्नि दसराया न निग्गच्छेना। मग्गसिरपुनिमा एत्तियं भणियं होइ मग्गसिरपुनिमाए परेण जइ विप्लवंतेहिं तहवि णिगंतव्वं। अब न निग्गच्छति ता चउलहुगा। एवं पंचमासिओ जेड्डोग्गहो। -द०००
SR No.090127
Book TitleAgam 37 Chhed 04 Dashashrutskandh Sutra Ek Adhyayan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAshok Kumar Singh
PublisherParshwanath Vidyapith
Publication Year1998
Total Pages232
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Philosophy, & agam_related_other_literature
File Size13 MB
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