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________________ ५८ ] [ चिदविलास उपचार से है, उपचार से जय ज्ञान में और ज्ञानज्ञेय में है । अतः वस्तुत्व (द्रन्य) की दृष्टि से 'सत्-उत्पाद' है और पर्याय की दृष्टि से 'असत्-उत्पाद है। शंका :- पर्याय के बिना द्रव्य नहीं, अतः पर्याय से द्रव्य की सिद्धि होती है । जबकि पर्याय से 'असत्-उत्पाद' है, इसलिए 'असल-उत्पाद' से 'सत-उत्पाद' सिद्ध हुया । तथा चूंकि द्रव्य से पर्याय (उत्पन्न) होतो है, अतः 'सत् उत्पाद से 'असत्-उत्पाद' हुमा । फिर यह क्यों कहा जाता है कि पर्याय की अपेक्षा 'असत-उत्पाद' और द्रव्य की अपेक्षा 'सत्-उत्पाद' होता है ? समाधान :-- पर्याय द्रव्य की कारण है और द्रव्य पर्याय का कारण है - यह तो कारण की बात हुई; परन्तु पर्याय का कार्य पर्याय से ही होता है और द्रव्य का कार्य द्रव्य से ही होता है । अतः पर्याय की अपेक्षा 'असत् उत्पाद' कार्य होता और द्रव्य की अपेक्षा 'सत्-उत्पाद' कार्य होता है । यह जो कारण-कार्य का भेद है, उसे विवेकी ही जानता है । जब पर्यायरूपी तरंग द्रव्यरूपी समुद्र से उठती है, तब विवे को जीव अानन्द की केलि (क्रीड़ा) में मग्न हुमा वर्तता है । परिणाम को प्रवृत्ति से ही द्रव्य-गुण की प्रवृत्ति १ प्रवचनसार गाथा १११
SR No.090125
Book TitleChidvilas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipchand Shah Kasliwal
PublisherKundkund Kahan Digambar Jain Trust
Publication Year
Total Pages160
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Spiritual
File Size2 MB
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