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________________ (६५) कामदेव हनुमान, मानी पुरुषोंमें आठवां प्रतिनारायण रावण, दानी पुरुषों में राजा श्रेयांस जिन्होंने कि आदि भगवानको इक्षुरसका आहार दिया था, शीलवती स्त्रियोंमें सीता, तपस्वियोंमें आदिनाथस्वामीके पुत्र वाहुबलि जिनके कि शरीरपर लताएँ चढ़ गई थीं, भाववान् पुरुषोंमें भरतचक्रवर्ती जिन्हें कि परिग्रह छोड़ते ही अन्तर्मुहूर्तमें केवलज्ञान प्राप्त हो गया था, रुद्रोंमें ग्यारहवां रुद्र महादेव, नव हरि अर्थात् नारायणोंमें नववे नारायण श्रीकृष्ण, चौदह कुलकरोंमें नामिराजा और बलवती भुजावालों में अर्थात् पराक्रमियोंमें कुन्तीका पुत्र भीम (पांडव ) बहुत प्रसिद्ध हुआ। । यों तो शलाका पुरुषोंमें सब ही प्रसिद्ध हैं; परन्तु लोकमें उनमेंसे उक्त पुरुष बहुत ही प्रसिद्ध हुए हैं। ___ सम्पूर्ण द्वीपसमुद्रोंके चन्द्रमाओंकी गिनती। सवैया इकतीसा । जंबूदीप दोय लवनांबुधिमैं चारि चंद, धातखंड बारै कालोदधि बियालीस हैं ॥ पुष्करके भाग दोय ईधर बहत्तरि हैं, ऊधै बारैसे चौसठि भासे जगदीस हैं ॥ पुष्कर जलधि सार दो सत ग्यारै हजार, आगें आगें चौगुनें बखानै निसदीस हैं। जेते लाख तेते बले दूने दूने अधिके हैं, सबमें असंख चैताले बंदत मुनीस हैं॥५०॥ च०५
SR No.090117
Book TitleCharcha Shatak
Original Sutra AuthorDyanatray
AuthorNathuram Premi
PublisherJain Granth Ratnakar Karyalay
Publication Year1926
Total Pages166
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Principle
File Size9 MB
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