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________________ (५३) जावेंगे, तब वह आगामी भवकी आयुको बाँधेगा । यदि उस समय नहीं बांध सकेगा, तो २१८७ के तिहाईमें अर्थात् ७२९ अंश शेष रहेंगे, तब बाँधेगा । यदि उस समय भी न बांध सका, तो २४३ अंश शेष रहनेपर बांधेगा । और तब भी न बांध सका तो त्रिभागके ८१, २७, ९, ३ और १ आदि स्थानों में बांधेगा। इस तरह आठ बार जो त्रिभाग हुए हैं, उनमेंसे किसी न किसीमें आयुका बंध कर ही लेगा और यदि आठों त्रिभाग चूक जावेगा, तो अपनी आयुके अन्त समयमें तो अवश्य ही अगली आयु बांध लेगा । विना अगली आयुका बंध किये कोई भी जीव वर्तमान आयुको नहीं छोड़ सकता है । और आयु कर्मका बंध त्रिभागमें या अन्तसमयमें होता है। सत्तावन जीवसमास। छप्पय । भूजल पावक वायु, नित्य ईतर साधारन । सूच्छम वादर करत, होत द्वादस उच्चारन ॥ सुप्रतिष्ठित अप्रतिष्ठ मिलत चौदह परवानौ । परज अपर्ज अलब्ध, गुनत व्यालीस बखानौ। गुन वे ते चौ इंद्री त्रिविध, सर्व एक पंचास भन । मनरहित सहित तिहुभेदसौं, सत्तावन धर दया ... . मन ॥ ४०॥ .
SR No.090117
Book TitleCharcha Shatak
Original Sutra AuthorDyanatray
AuthorNathuram Premi
PublisherJain Granth Ratnakar Karyalay
Publication Year1926
Total Pages166
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Principle
File Size9 MB
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