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________________ (४४) अभावना, छहलेश्या-कृष्ण, नील, कापोत, पीत, पद्म, शुक्ल, पांच व्रत-अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य, परिग्रहत्याग, पांच समिति-ईयो, भाषा, एषणा, आदाननिक्षेपणा, प्रतिष्ठापना, पांच चारित्र-सामायिक, छेदोपस्थापना, परिहारविशुद्धि, सूक्ष्मसाम्पराय, यथाख्यात, पांच गति-नरक, देव, मनुष्य, तिर्यंच, मोक्ष, पांच ज्ञान-मति, श्रुत, अवधि, मनःपर्यय, और केवल इन सब बातोंपर जो श्रद्धान करना, प्रतीत करना, और मनमें रुचि धारण करना है, वही मुक्तिका मूल सम्यग्दर्शन है । उन सर्वज्ञ देवके चरणोंको मैं मस्तकपर हाथ रखके नमस्कार करता हूं, जिन्होंने ये सब बातें बतलाई हैं। १९९॥ लाख कुलकोड़का ब्योरा। सवैया इकतीसा । पृथ्वीकाय बीस दोय जल सात तेज तीनि, - वायु सात तरु बीस आठ परमानिए । वे ते चउ इंद्री सात आठ नव खग बारै, ___ जलचर साढ़े बारै चौपे दस जानिये ॥ सरीसृप नव नारकी पचीस नर चौदै, देवता छबीस लाख कुल कोरि मानिए । दोय कोराकोरीमाहिं आध लाख कोरि नाहिं, सबकौं निहारिकै दयाल भाव आनिए॥३२॥
SR No.090117
Book TitleCharcha Shatak
Original Sutra AuthorDyanatray
AuthorNathuram Premi
PublisherJain Granth Ratnakar Karyalay
Publication Year1926
Total Pages166
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Principle
File Size9 MB
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