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________________ ( १४५ ) सम्बन्धी तारोंकी संख्या २४१ है । फिर इन प्रत्येक तारोंके सम्बन्धी ग्यारह सौ ग्यारह ग्यारह तारे हैं । इस तरह सब मिलाकर २६७९९२ तारे हैं । इन सब तारों में जिनेन्द्रदेव के अकृत्रिम चैत्यालय हैं, ऐसा जिनवाणीमें कहा है। कौन कौन नक्षत्रोंके कितने कितने और कौन कौन तारे हैं, यह नीचे लिखे कोष्टकमें बतलाया है: अट्ठाईस नक्षत्रोंके तारे । १ कृत्तिका २ रोहिणी ३ मृग ४ आर्द्रा ५ पुनर्वसु ६ पुष्य ७ अश्लेषा ८ मघा ९ पूर्वा १० उत्तरा ११ हस्ति १२ चित्रा १३ स्वाती १४ विशाखा ६ १५ अनुराधा १६ ज्येष्ठा च० श० १० ५ ३ १७ मूल १ १८ पूर्वाषाढ ६ । १९ उत्तराषाढ ३ २० अभिजित ४ ६ २१ श्रवण २२ धनिष्ठा २ २३ शततारिका २ २४ पूर्वा भाद्रपदा ५ | २५ उत्तरा भाद्रपदा १ | २६ रेवती १ २७ अश्विनी ४ | २८ भरणी अट्ठाईस नक्षत्रों के तारे प्रत्यक तारे के तारे सम्पूर्ण तार ६ ३ ३. १११ २ २ ३२ ३ . २४१ १११२ २४१×१११२=२६७९९२
SR No.090117
Book TitleCharcha Shatak
Original Sutra AuthorDyanatray
AuthorNathuram Premi
PublisherJain Granth Ratnakar Karyalay
Publication Year1926
Total Pages166
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Principle
File Size9 MB
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