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________________ ऋषभ विवाहलो समरवी सरसति घो मुझ शुभमति, करो वर वाणी पसाउ लोए । प्रथम तीर्थकर प्रादि जिनेश्वर वरणवू तास विवाहलोए । जे नर नारिए भासए सारिण, सांभलसे मन नीरमलीए । पांमसे सुख धरणां वांछित मनतरणा, भवि भवि नवल वलीए ।। १ ॥ उलाबो बलीय धरणूसु' बखांणीए जागीए भूतले नामए । सरस सीम सोमणि धन बन अनुपम गामए । झलहले नीर भर्या सरोवर, कमल परिमल महे महे । हंस सारस रमें रंगे, नदी नीरमल जलबहे ।। २ ।। चाल नाभिराजा एवं मत्येवी राणी : देश कोशल वर तिहां सुरपति पुर, सम मोहे नगर रलीयां मरणुए। कोशला सुन्दर सतखणा मन्दिर, सुरे वरचारण फरु गद तराए।॥ ३ ॥ माणिक चोकए चतुर सुलोकए, बहुटा चोराशी जिहां नव नवाए !! भोग पुरंदर नर स्पं रतिवर, कामिनि कठे कोयलपिय ।। ४ ॥ राज रंगे करे महिपति माभि राजा नय भलो। चउदमो कुचकर सकल सुखकर जगत जाणे गुण निलो । सस पटरानी कविवर-बाणी चतूर मरुदेवी भली । अति मधुरवाणी परवागी रति हरायि रसकली ।। ५ चाल ।।
SR No.090103
Book TitleBhattarak Ratnakirti Evam Kumudchandra Vyaktitva Evam Kirtitva Parichay
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKasturchand Kasliwal
PublisherMahavir Granth Academy Jaipur
Publication Year
Total Pages269
LanguageHindi
ClassificationSmruti_Granth, Biography, & Story
File Size4 MB
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