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________________ 591 593 594 595-620 595 595 596 597 597 598 598 599 राहु द्वारा होने वाले चन्द्रग्रहण का फल नक्षत्रानुसार चन्द्रग्रहण का फल नक्षत्रों का विद्ध फल इक्कीसवाँ अध्याय केतुओं के वर्णन की प्रतिज्ञा केतुओं के चिह्न का कथन केतु वर्ण का फल तीन सिर के केतु फल छिद्र रहित केतु का फल धूम्रवर्ण के केतु का फल केतु की शिखा का फल गोल केतु का स्वरूप और फल विक्रान्त केतु का स्वरूप और फल कबन्ध केतु का स्वरूप और फल मंडली और मयूरपक्षी केतु धूमकेतु समान केतु का फल धूमकेतु का विशेष फल केतूदय का फल विपथ केतु का फल स्वाति नक्षत्र में उदित केतु का फल सदृश केतु का फल भय उत्पन्न करने वाले केतुओं की नामावली उत्पात नहीं करने वाले केतु केतु शान्ति के लिए पूजा विधान की आवश्यकता केतुओं के भेद और स्वरूप 1880 केतुओं की संख्या और फल 599 600 600 601 602 605 606 606 607 610 610 613 615
SR No.090074
Book TitleBhadrabahu Sanhita Part 2
Original Sutra AuthorBhadrabahuswami
AuthorKunthusagar Maharaj
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1268
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Jyotish
File Size28 MB
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