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________________ 503 503 504 शनि के कृष्णवर्ण का फल शनि के युद्ध का फल शनि के अस्तोदय का फल द्वादश राशियों में शनि की स्थिति का फल शनि के उदय का विचार शनि के अस्त का विचार नक्षत्रानुसार शनि का फल 505 507 508 509 सप्तदश अध्याय 513-535 513 513 513 514 514 514 514 515 गुरु के उदयास्त के कथन की प्रतिज्ञा बृहस्पति के मंडल का अशुभत्व बृहस्पति के मेचकवर्ण के मंडल का फल बृहस्पति के तीन चार नक्षत्रों के बीच के गमन का फल बृहस्पति के मध्यम मार्ग का कथन बृहस्पति के दक्षिण मार्ग के नक्षत्र बृहस्पति का दक्षिणोत्तर मार्ग बृहस्पति और केतु के दक्षिण मार्ग का कथन बृहस्पति और केतु के दक्षिण मार्ग का फल बृहस्पति में दीप्त होकर उत्तर की ओर से स्वाति नक्षत्र के गमन का फल बृहस्पति के हस्वमार्ग, प्रतिलोम और अनुलोम मार्ग का कथन बृहस्पति के संवत्सर वर्ष का फल बृहस्पति के पुष्यादि दो नक्षत्रों के गमन का फल बृहस्पति के गुरुपुष्य योग के समान योग करने वाले नक्षत्र बृहस्पति के नक्षत्रों के अनुसार अंग-प्रत्यंगों का विवेचन बहस्पति द्वारा कत्तिका और रोहिणी के घात का फल पुष्य नक्षत्र के घात का फल सौम्यायन संवत्सर में विशाखा नक्षत्र पर बृहस्पति के गमन का फल 515 515 516 517 518 519 519 520 520 521
SR No.090074
Book TitleBhadrabahu Sanhita Part 2
Original Sutra AuthorBhadrabahuswami
AuthorKunthusagar Maharaj
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1268
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Jyotish
File Size28 MB
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