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________________ 364 364 366 367 367 368 369 369 370 371 371 372 372 असमय में पीपल के पेड़ के पुष्पित होने का फल इन्द्रधनुष के रंगों द्वारा फल कथन चन्द्रोत्पातों का फलादेश शिव और वरुण की प्रतिमाओं के उत्पातों का फल बलदेव की प्रतिमा के छन भंग का फल वासुदेव, प्रद्युम्न और सूर्य की प्रतिमा के उत्पातों का कथन लक्ष्मी की मूर्ति और श्मशान भूमि के उत्पात विश्वकर्मा, भद्रकाली, इन्द्राणी की प्रतिमा में उत्पातों का फल धन्वन्तरि और परशुराम की प्रतिमा के विकारों का फल सन्ध्याकाल में कबन्ध निमित्त का फल सुलसा और सूत मूर्ति के विकारों का फल अर्हन्त प्रतिमा के विकारों का फल रति प्रतिमा के उत्पात का फल सूर्य के वर्ण के अनुसार फल कथन चन्द्रोत्यात का विचार ग्रहों के परस्पर भेदन का विचार ग्रहों के वर्णोत्पात का कथन ग्रहयुद्ध और ग्रहोत्पात का कथन देवों के हैंसने, रोने आदि उत्पातों का कथन पृथ्वी के नीचे धैसने का फल धूल और राख बरसने का फल पशुओं की हड्डी और मांसादि के बरसने का फल विकृत और विचित्र आकार के मनुष्यों का फल सियारिनों के नगर में प्रवेश करने का फल विभिन्न ग्रहों के प्रताड़ित मार्ग में विभिन्न ग्रहों के गमन का फल निर्जीव पदार्थों के विकृत होने का फल पूजादि के स्वयमेव बन्द होने का फल 373 374 376 377 378 379 380 380 381 381 382 383 384 385
SR No.090074
Book TitleBhadrabahu Sanhita Part 2
Original Sutra AuthorBhadrabahuswami
AuthorKunthusagar Maharaj
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1268
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Jyotish
File Size28 MB
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